हनुमानगढ़/राजस्थान। ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ वाली कहावत तो पुरानी हो गई, लेकिन राजस्थान में इस बार तिनका नहीं, बल्कि 9 करोड़ रुपये का पूरा खेल रंगे हाथों पकड़ा गया है। राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) ने गुरुवार को हनुमानगढ़ के पल्लू स्थित SBI बैंक की शाखा में औचक निरीक्षण कर एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने बैंकिंग और बीमा सिस्टम की धज्जियां उड़ा दी थीं।
कैसे खुला 9 करोड़ का ‘बीमा स्कैम’?
गुरुवार दोपहर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा अचानक हनुमानगढ़ के पल्लू में SBI बैंक की शाखा में दाखिल हुए। उन्होंने जब दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की, तो वहां मौजूद अधिकारी हक्के-बक्के रह गए। जांच में सामने आया कि 162 लोगों के फर्जी खाते खोलकर उन्हें ‘ऋणी किसान’ दिखाया गया था।
हैरानी की बात यह है कि इन लोगों के पास राजस्व रिकॉर्ड में एक इंच भी जमीन नहीं थी, फिर भी फर्जी खसरा और मुरब्बा नंबर का इस्तेमाल कर खरीफ 2025 की मूंगफली फसल का बीमा कर दिया गया।
बिना जमीन के करोड़ों का क्लेम: सिस्टम पर सवाल
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का दावा है कि इसी हफ्ते करीब 9 करोड़ रुपये इन फर्जी खातों में ट्रांसफर होने वाले थे। यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती, तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत यह राजस्थान का अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा साबित होता।
मंत्री ने उठाए कड़े सवाल:
-बिना जमीन के रिकॉर्ड (जमाबंदी) के बैंक ने ऋणी किसान कैसे मान लिया?
-बीमा कंपनी ने बिना दस्तावेजों की भौतिक जांच किए क्लेम कैसे पास कर दिया?
-फर्जी खसरा नंबर सरकारी सिस्टम और बैंक पोर्टल पर अपलोड कैसे हुए?
जब मंत्री ने बैंक मैनेजर से रिकॉर्ड मांगा, तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। इस पर भड़कते हुए मंत्री ने कहा, ‘मैंने अपनी राजनीतिक जिंदगी में ऐसी खुली लूट कभी नहीं देखी।’
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गजनेर में भी 6 करोड़ की सेंधमारी का शक
खबरें यह भी हैं कि यह नेटवर्क सिर्फ हनुमानगढ़ तक सीमित नहीं है। बीकानेर के गजनेर में भी करीब 6 करोड़ रुपये के इसी तरह के फर्जी क्लेम का मामला सामने आ रहा है। कृषि मंत्री ने अब इस पूरे प्रकरण की हाई लेवल जांच (SIT)के आदेश दे दिए हैं। साथ ही संदिग्ध खातों को फ्रीज करने और दोषी बैंक व बीमा कंपनी के अधिकारियों पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों के हक पर डाका
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना असली किसानों की मदद के लिए है, लेकिन जिस तरह से बिचौलियों और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये डकारने की तैयारी थी, उसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच की आंच किन बड़े रसूखदारों तक पहुंचती है।



