नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के तेल-तिलहन बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। सरसों तेल-तिलहन और बिनौला तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई, जबकि कम आवक के कारण सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम मजबूत हुए। दूसरी ओर, मलेशिया एक्सचेंज में अवकाश रहने के चलते कच्चे पाम तेल और पामोलीन तेल के भाव स्थिर बने रहे। गर्मी की मूंगफली फसल की आवक जारी रहने से मूंगफली तेल-तिलहन की कीमतों में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी सरसों पेराई मिलों द्वारा खरीद मूल्य घटाए जाने का असर सरसों तेल और तिलहन के बाजार पर पड़ा है। सरसों के ऊंचे भाव के कारण खरीदारों की संख्या सीमित बनी हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव देखने को मिला। वहीं बिनौला बाजार में पर्याप्त माल उपलब्ध नहीं होने के कारण इसकी गतिविधियां भी कमजोर बनी हुई हैं। बताया जा रहा है कि पंजाब और हरियाणा में बिनौला प्रसंस्करण से जुड़ी 90 से 95 प्रतिशत मिलें कच्चे माल की कमी के चलते बंद हैं।
सोयाबीन बाजार में स्थिति कुछ अलग रही। पिछले कुछ दिनों में सोयाबीन के दाम करीब 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल तक घटे थे। इसके बाद प्रसंस्करण इकाइयों ने खरीद मूल्य और नीचे करने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने कम कीमतों पर बिक्री से परहेज किया। परिणामस्वरूप बाजार में आवक घटी और सोयाबीन तेल-तिलहन की कीमतों को समर्थन मिला।
भावों की बात करें तो सरसों तिलहन 7,650-7,675 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि मूंगफली 6,525-7,100 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में रही। सरसों तेल दादरी का भाव 15,700 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। वहीं सोयाबीन तेल दिल्ली मिल डिलिवरी 15,525 रुपये और इंदौर मिल डिलिवरी 15,475 रुपये प्रति क्विंटल रही।पाम तेल बाजार में सीपीओ एक्स-कांडला 13,550 रुपये प्रति क्विंटल और आरबीडी पामोलीन दिल्ली 15,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा। दूसरी ओर, सोयाबीन दाना 6,925-6,975 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में किसानों की बिकवाली, वैश्विक बाजार की दिशा और खाद्य तेलों की मांग के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।



