भीषण गर्मी में पानी चोरी, आखिर कर क्या रहे हैं जिम्मेदार

    एक तो भीषण गर्मी और उस पर पानी की किल्लत। कहने को तो एक-डेढ़ घंटे की सप्लाई पर प्रेशर मात्र दस-पंद्रह मिनट। यह हाल अकेले पत्रकार कॉलोनी का नहीं, राजधानी जयपुर के अनेक इलाकों में हर घर को पूरा पानी नहीं मिल रहा है।

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    एक तो भीषण गर्मी और उस पर पानी की किल्लत। कहने को तो एक-डेढ़ घंटे की सप्लाई पर प्रेशर मात्र दस-पंद्रह मिनट। यह हाल अकेले पत्रकार कॉलोनी का नहीं, राजधानी जयपुर के अनेक इलाकों में हर घर को पूरा पानी नहीं मिल रहा है। बिल तो सभी देते हैं, फिर भी सबको उनके हक का पानी क्यों नहीं मुहैया हो रहा है। पब्लिक शिकायत करती है तो उन्हें टरका दिया जाता है। रसूखदार मौज में है, आमजन अपना दु:खड़ा किससे कहे। जिम्मेदार अफसर सुन नहीं रहे और पूरी व्यवस्था को संभालने की ठेकेदारी करने वाले की गफलत कोई पकड़ नहीं रहा।

    पत्रकार कॉलोनी समेत शहर के कई इलाकों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ लोग पाइपलाइन से सीधे बूस्टर लगाकर जरूरत से ज्यादा पानी खींच लेते हैं। इसका खामियाजा उन आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है, जिनके घरों तक पर्याप्त दबाव से पानी ही नहीं पहुंच पाता। सवाल यह है कि जब यह समस्या वर्षों पुरानी है और विभाग को इसकी जानकारी भी है, तो फिर नियमित जांच क्यों नहीं हो रही?
    बूस्टर लगाकर पानी खींचना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि दूसरों के हिस्से के पानी पर डाका डालने जैसा है। मोहल्लों-कॉलोनियों के कुछ घरों में लगाए गए बूस्टर पूरी लाइन का दबाव बिगाड़ देते हैं। आलम यह है कि आगे के घरों को पानी से वंचित होना पड़ रहा है। बेचारे अलग से दाम खर्च कर टैंकर मंगवा रहे हैं। जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। एक ओर सरकार पर्याप्त पेयजल आपूर्ति के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर पत्रकार कॉलोनी समेत कई इलाकों के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। समस्या केवल पानी की कमी की नहीं है, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त असमानता की भी है। जिन घरों में अवैध बूस्टर पंप लगे हुए हैं, वहां टंकियां भर रही हैं, जबकि सामान्य उपभोक्ताओं के नलों में पर्याप्त दबाव से पानी तक नहीं पहुंच पा रहा।


    विडंबना यह है कि जलदाय विभाग को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई अक्सर कागजों तक ही सीमित रह जाती है। कभी-कभार अभियान चलाकर कुछ बूस्टर जब्त कर लिए जाते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। यही वजह है कि हर गर्मी में जल संकट और लोगों का आक्रोश बढ़ता जाता है। हाल ही में जयपुर में पानी की किल्लत को लेकर लोगों ने विरोध-प्रदर्शन भी किए और प्रशासन को चेतावनी दी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जलदाय विभाग की कार्रवाई अक्सर शिकायत मिलने के बाद ही शुरू होती है। नियमित निरीक्षण, आकस्मिक जांच और तकनीकी निगरानी की व्यवस्था लगभग नदारद दिखाई देती है। कभी-कभार अभियान चलाकर कुछ बूस्टर जब्त कर लिए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास नजर नहीं आते। यदि विभाग चाहे तो संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर लगातार निगरानी कर सकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है।


    आखिर क्या डर है, किसके दबाव या लाभ के चलते कुछ लोगों को पानी चोरी का संरक्षण मिल रहा है। कौन है जो इस गड़बड़ी को अनदेखा कर रहा है। असल में बूस्टर से पानी चोरी रुक ही नहीं रहा, वो भी इसलिए कि जिनकी जिम्मेदारी है कि वो इसे रोकें, घरों की चैकिंग करें। जनता की शिकायतों का निस्तारण करें, वो जवाबदेह अनजान बने हुए हैं। बात सिर्फ पत्रकार कॉलोनी या फिर उसके आसपास इलाके ही नहीं, यह हर घर के साथ हो रहे अन्याय की बात है जिसे पानी नहीं मिल रहा। सरकार जब आमजन को पानी की परेशानी नहीं आने की बात कहती है तो फिर ये जिम्मेदार क्यों इस पर गंभीरता नहीं दिखाते।

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