भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का निधन हो गया। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। करीब 75 वर्षीय आरके सिन्हा लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से भाजपा सहित राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर फैल गई है।
परिजनों के मुताबिक, उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली से पटना के पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन लाया जाएगा। यहीं से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और अंतिम संस्कार किया जाएगा।
आरके सिन्हा राजनीति के साथ-साथ कारोबार की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान रखते थे। वे देश की प्रमुख सिक्योरिटी एजेंसी सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) के संस्थापक थे। उन्होंने 2014 से 2020 तक राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य किया। जनसंघ और भाजपा की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही। वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के करीबी माने जाते थे। उनके बेटे ऋतुराज सिन्हा भी भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।
आरके सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी नौकरी चली गई थी। इसके बाद जयप्रकाश नारायण से मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। जेपी की सलाह पर उन्होंने ऐसी संस्था शुरू करने का फैसला किया, जिसमें सेवानिवृत्त सैनिकों को रोजगार मिल सके। इसी सोच के साथ उन्होंने SIS की स्थापना की, जिसका विस्तार आगे चलकर कई देशों तक हुआ।
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनके निधन पर दुख जताते हुए कहा कि संगठन के प्रति उनका समर्पण, अनुभव और मार्गदर्शन हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।



