Thursday, April 23, 2026
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सचिन पायलट बनेंगे राजस्थान के CM? गहलोत-पायलट में हुई ‘महा-सुलह’, दिल्ली की एक तस्वीर ने उड़ाए विरोधियों के होश!

क्या सचिन पायलट (Sachin Pilot) बनेंगे राजस्थान के अगले मुख्यमंत्री? दिल्ली में अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और सचिन पायलट की ऐतिहासिक मुलाकात और सुलह के बाद राजस्थान की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। जानिए बीजेपी के लिए ये कितनी बड़ी चुनौती है।

नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान की सियासत का वो सवाल, जिसका जवाब पिछले 6 सालों से पूरा देश ढूंढ रहा था, क्या आज उस पर मुहर लग गई है? क्या राजस्थान के दो सबसे बड़े सियासी ‘दुश्मन’ अब ‘दोस्त’ बन चुके हैं? जी हां, दिल्ली के गलियारों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने जयपुर से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। ‘निकम्मा’ और ‘गद्दार’ जैसे शब्दों से शुरू हुआ ये सफर, आज एक हंसते हुए ‘ठहाके’ और गर्मजोशी से मिलाए गए ‘हाथ’ तक पहुंच गया है। क्या ये सिर्फ एक फोटो है या फिर साल 2028 के लिए कांग्रेस का वो ‘ब्रह्मास्त्र’ जो बीजेपी के किले को ढहा देगा? आज बात करेंगे उस सुलह की, जिसने राजस्थान पॉलिटिक्स के सारे समीकरण पलट कर रख दिए हैं!

AICC मुख्यालय में दिखा ‘जादू’ और ‘जोश’ का संगम

बुधवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस हेड ऑफिस (AICC) में ‘OBC एडवाइजरी काउंसिल’ की बैठक चल रही थी। माहौल गंभीर था और पार्टी के दिग्गज नेता पहुंच रहे थे, लेकिन तभी एक ऐसी घटना घटी जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की गाड़ी मुख्यालय पहुंची और ठीक उनके पीछे गाड़ी थी पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की।

जैसे ही गहलोत गाड़ी से उतरे, सचिन पायलट ने आगे बढ़कर उनका सत्कार किया और कहा— “सर, AICC में आपका स्वागत है।” ये शब्द सुनने के बाद गहलोत के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वो राजस्थान की राजनीति में ‘बर्फ पिघलने’ का सबसे बड़ा सबूत मानी जा रही है।

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गहलोत का वो बयान: ‘ये फोटो बहुत जरूरी है’

गहलोत ने मीडिया की ओर इशारा करते हुए मजाक में कहा-‘ये फोटो बहुत जरूरी है, आप लोग इधर-उधर दिखाते रहते हो कि हमारे बीच बनती नहीं है।’ इसके जवाब में पायलट ने भी ठहाका मारते हुए कहा-‘हमारे बीच अनबन सिर्फ अफवाहें हैं।’

यह केवल एक मजाकिया बातचीत नहीं थी, बल्कि उन करोड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक ‘बड़ा सिग्नल’ था जो अब तक दो गुटों में बंटे हुए थे। गहलोत का यह कहना कि ‘ये फोटो जरूरी है’, साफ इशारा करता है कि आलाकमान ने दोनों के बीच उस खाई को पाट दिया है जो 2020 की बगावत के बाद से चौड़ी होती जा रही थी।

बीजेपी के लिए ‘खतरे की घंटी’?

राजस्थान में बीजेपी की जीत की एक बड़ी वजह हमेशा से कांग्रेस की ‘अंतर्कलह’ रही है। जब तक गहलोत और पायलट गुट अलग-अलग थे, बीजेपी को इसका सीधा फायदा मिलता रहा। लेकिन अगर अब गहलोत ने यह स्वीकार कर लिया है कि भविष्य सचिन पायलट का है, और अगर वो अपना ‘जादू’ पायलट को सीएम बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो 2028 में बीजेपी के लिए राह बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है।

अगर पायलट का ‘युवा जोश’ और गहलोत का ‘अनुभव’ एक हो जाए, तो राजस्थान की ‘एक बार कांग्रेस-एक बार बीजेपी’ वाली रीत बदल सकती है। क्या यह गहलोत का पायलट को ‘आशीर्वाद’ है? क्या यह इस बात का संकेत है कि अब पायलट ही राजस्थान में कांग्रेस का चेहरा होंगे? ये सस्पेंस अब बीजेपी के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा रहा है।

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तीसरा मोर्चा: हनुमान बेनीवाल की बढ़ती ताकत

हालांकि, राजस्थान की बिसात पर सिर्फ दो ही खिलाड़ी नहीं हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस में सुलह हो रही है, वहीं दूसरी तरफ नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल भी अपनी ताल ठोक रहे हैं। आधी रात के बाद भी हजारों की भीड़ जुटा लेना बेनीवाल की वो ताकत है जिसे कोई भी नजरअंदाज नहीं कर सकता।

शादी हो, जागरण हो या आंदोलन का मंच, बेनीवाल की ‘लोकप्रियता’ का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, खींवसर की हार ने उन्हें एक बड़ा सबक दिया है, लेकिन आरएलपी का वर्चस्व कायम करने की उनकी जद्दोजहद आज भी जारी है। राजस्थान की जनता में आजकल बीजेपी-कांग्रेस से ज्यादा चर्चा हनुमान बेनीवाल के अंदाज की होती है।

2028 की जंग होगी दिलचस्प

तो क्या 2028 में मुकाबला गहलोत-पायलट की ‘जुगलबंदी’ बनाम ‘बीजेपी’ होगा? या फिर हनुमान बेनीवाल ‘तीसरे मोर्चे’ के रूप में सत्ता की चाबी अपने पास रखेंगे? राजस्थान की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां हर तस्वीर एक नई कहानी कह रही है।

गहलोत और पायलट की यह सुलह दिल से है या सिर्फ कैमरे के लिए, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि राजस्थान की सियासत में ‘पायलट’ अब नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार हैं।

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