जयपुर। राजस्थान की राजनीति में इन दिनों स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर पारा चढ़ा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत का आरोप है कि उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई ‘राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम’ (RGHS) को वर्तमान सरकार लापरवाही से विफल कर रही है। आइए जानते हैं कि इस योजना का इतिहास क्या है और मौजूदा समय में इसे लेकर क्या विवाद चल रहा है।
अशोक गहलोत का बड़ा आरोप: ‘स्कीम को बर्बाद कर रहे हैं लोग’
अशोक गहलोत ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि पेंशनर समाज, सेवारत कर्मचारी, विधायक और पत्रकार—सभी इस योजना की दुर्दशा से दुखी हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर कहीं बेईमानी हुई है, तो आप कड़ी कार्रवाई करें, लेकिन कुछ लोगों की गलती की सजा पूरी स्कीम को न दें।’ गहलोत का दावा है कि दवा दुकानों और निजी अस्पतालों का हजारों करोड़ रुपया बकाया है, जिसके कारण उन्होंने इलाज और दवा देना बंद कर दिया है। यह स्थिति आम आदमी के लिए खतरनाक साबित हो रही है।
क्या है RGHS योजना? (इतिहास और लाभ)
-गहलोत सरकार ने 1 जुलाई 2021 को RGHS योजना को लागू किया था।
-इसमें विधायक, पूर्व विधायक, सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके आश्रितों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है।
-प्रदेश के लगभग 27 लाख से ज्यादा लाभार्थी (7.5 लाख परिवार) इस योजना से जुड़े हुए हैं। इसमें निजी और सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ मेडिकल स्टोर्स का एक बड़ा नेटवर्क शामिल है।
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क्या वाकई इलाज और दवाइयां बंद हैं?
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के कई हिस्सों में मेडिकल स्टोर्स ने ‘पेंडिंग पेमेंट’ के कारण RGHS के तहत दवाइयां देना बंद कर दिया है। निजी अस्पतालों ने भी ऑपरेशन और गंभीर बीमारियों के इलाज में बकाया भुगतान न होने का हवाला देकर हाथ पीछे खींच लिए थे। हालांकि, राजधानी जयपुर समेत कई बड़े शहरों में सरकारी मेडिकल काउंटर्स (Confed) के जरिए दवाइयां मिल रही हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
भजनलाल सरकार का पक्ष: ‘हम सफाई कर रहे हैं, बंद नहीं’
गहलोत के आरोपों पर भाजपा सरकार और चिकित्सा मंत्री की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वे योजना को बंद नहीं कर रहे, बल्कि इसमें व्याप्त ‘भ्रष्टाचार’ और ‘फर्जीवाड़े’ को खत्म कर रहे हैं।
बकाया भुगतान: भजनलाल सरकार का दावा है कि उन्होंने पिछला बकाया चुकाने के लिए फंड जारी कर दिया है और पेमेंट की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
फर्जी बिलों की जांच: सरकार का पक्ष है कि पिछली सरकार के समय कई अस्पतालों और स्टोर संचालकों ने फर्जी बिल बनाकर करोड़ों का घोटाला किया। अब उन बिलों की स्क्रूटनी (जांच) की जा रही है, जिससे भुगतान में थोड़ा समय लग रहा है।
सुधार की प्रक्रिया: सरकार का कहना है कि वे RGHS पोर्टल को और अधिक पारदर्शी बना रहे हैं ताकि केवल पात्र लोगों को ही इसका लाभ मिले और सरकारी खजाने की लूट रुके।
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फिलहाल, RGHS को लेकर स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। जहां एक तरफ पेंशनर और कर्मचारी इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और विपक्ष के बीच इस ‘क्रेडिट वॉर’ ने आम जनता को बीच में फंसा दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आश्वस्त किया है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को इलाज से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर पेमेंट संकट दूर होने के बाद ही यह योजना दोबारा सुचारू हो पाएगी।



