SEBI ने बेंगलुरु की जूलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया है. कंपनी पर वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और फंड की हेराफेरी का गंभीर आरोप है. हालांकि कंपनी ने वित्तीय अनियमितताओं और राजस्व में हेरफेर के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. कंपनी ने कहा है कि उसके द्वारा घोषित सभी राजस्व आंकड़े पूरी तरह सही हैं और बाजार नियामक SEBI (सेबी) के साथ हुई किसी गलतफहमी या संचार संबंधी भ्रम के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है.
शेयर बाजार और LIC पर असर
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के आदेश का असर शेयर बाजार में तुरंत देखने को मिला. राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में करीब 5% की तेज गिरावट दर्ज की गई. इस घटनाक्रम का प्रभाव भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पर भी पड़ा, क्योंकि नवीनतम शेयरधारिता आंकड़ों के अनुसार कंपनी में उसकी 10.80% हिस्सेदारी है। इसके चलते एलआईसी के शेयरों में भी 1% से अधिक की गिरावट देखने को मिली.
क्या काम करती है कंपनी
राजेश एक्सपोर्ट्स, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में है, ग्लोबल गोल्ड और आभूषण उद्योग में एक प्रमुख पहचान रखती है. यह भारतीय कंपनी दुनिया के कई देशों में आभूषणों का निर्यात करती है और अपने उच्च वार्षिक राजस्व के कारण लंबे समय से इस क्षेत्र की भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में गिनी जाती रही है
कंपनी पर क्या हैं आरोप ?
कंपनी की यह प्रतिक्रिया उस कार्रवाई के एक दिन बाद आई है, जिसमें सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रवर्तक, चेयरमैन और सीईओ राजेश मेहता पर वित्तीय विवरणों में कथित हेरफेर और कंपनी के कोष के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे. इसके साथ ही सेबी ने कंपनी के प्रतिभूतियों में कारोबार पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश भी जारी किया था.
कंपनी ने आरोपों को पूरी तरह गलत बताया
बेंगलुरु स्थित इस ज्वेलरी निर्यातक और रिफाइनिंग कंपनी ने BSE को दी गई सूचना में कहा कि उसके वित्तीय आंकड़ों में किसी प्रकार की अतिशयोक्ति नहीं की गई है. कंपनी के अनुसार, ‘घोषित राजस्व पूरी तरह सही हैं और उनमें किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है. ऐसा प्रतीत होता है कि सेबी और कंपनी के बीच कुछ संचार संबंधी भ्रम या गलतफहमी हुई है.’
दस्तावेजों के साथ कंपनी देगी स्पष्टीकरण
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि सेबी का आदेश फिलहाल अंतरिम प्रकृति का है और अभी तक किसी भी मुद्दे पर अंतिम या प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है. राजेश एक्सपोर्ट्स का कहना है कि वह सेबी को सभी आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में है, ताकि मामले के सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके.
कंपनी ने भरोसा जताया कि प्रमाणित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर सेबी स्थिति को समझेगा और उचित निष्कर्ष पर पहुंचेगा. वहीं, सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में कंपनी को वित्तीय विवरणों, संबंधित पक्षों के साथ हुए लेन-देन और अन्य नियामकीय खुलासों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. अब निवेशकों की नजर सेबी की आगे की जांच और कंपनी द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों पर टिकी हुई है.
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