जयपुर (प्रज्ञा पांडे)। राजस्थान के झालावाड़ जिले से खेती में नवाचार की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां एक किसान ने पारंपरिक खेती के साथ नई फसल का प्रयोग कर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। किसान ने संतरे के बगीचे के बीच खाली जगह का इस्तेमाल कर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की, जो अब आसपास के किसानों के लिए भी मिसाल बन रही है। झालावाड़ जिले के मिश्रोली गांव के किसान मुकेश पाटीदार ने अपने संतरे के बगीचे में खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग करने का फैसला किया। उन्होंने संतरे के पेड़ों के बीच ड्रैगन फ्रूट के करीब 400 पौधे लगाए। यह पहल उनके बेटे के सुझाव से शुरू हुई, जो JEN पद पर कार्यरत हैं। बेटे ने उन्हें पारंपरिक खेती के साथ किसी नई और लाभकारी फसल को अपनाने की सलाह दी। इसके बाद मुकेश पाटीदार ने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की।
किसान मुकेश पाटीदार ने बताया कि संतरे के पेड़ों के बीच खाली जगह का उपयोग करने से उन्हें अलग से जमीन की जरूरत नहीं पड़ी। अब एक ही खेत से उन्हें संतरे और ड्रैगन फ्रूट दोनों फसलों का लाभ मिलने की उम्मीद है। ड्रैगन फ्रूट की खेती की खास बात यह है कि इसमें कई पारंपरिक फसलों की तुलना में पानी की आवश्यकता कम होती है। इसके पौधे कई वर्षों तक फल देते हैं, जिससे किसानों को लंबे समय तक आय का स्रोत मिल सकता है।
बदलते मौसम और पानी की समस्या को देखते हुए किसान अब ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें लागत कम और मुनाफे की संभावना ज्यादा हो। ड्रैगन फ्रूट भी ऐसी ही फसलों में शामिल है, जिसे कई किसान अतिरिक्त आय के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। किसान मुकेश पाटीदार का कहना है कि खेती में नई तकनीक और नए प्रयोगों को अपनाकर सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। झालावाड़ के इस किसान का प्रयोग अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। यह कहानी बताती है कि खेती में बदलाव की शुरुआत छोटे-छोटे प्रयासों से की जा सकती है। अगर किसान नई जानकारी, आधुनिक तकनीक और सही योजना के साथ खेती करें तो कम जमीन में भी आय के नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं।



