जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायत और निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस, भाजपा, बीएसपी और एआईएमआईएम के बाद अब केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) ने भी प्रदेश में चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अठावले ने घोषणा की कि उनकी पार्टी राजस्थान के सभी 35 जिलों में त्रि-स्तरीय पंचायती राज चुनावों में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
भाजपा के साथ मिलकर लड़ेगी चुनाव
रामदास अठावले ने स्पष्ट किया कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा है और राजस्थान में भी भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक होगा, वहां दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल और गठबंधन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य दलित, शोषित, पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज को स्थानीय निकायों तक मजबूत तरीके से पहुंचाना है।
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भूमिहीन परिवारों को 5-5 एकड़ जमीन देने की मांग
प्रेस वार्ता के दौरान अठावले ने राज्य सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि गांवों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन को रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भूमिहीन और गरीब परिवारों को 5-5 एकड़ कृषि भूमि आवंटित की जानी चाहिए। उनका कहना था कि इससे ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
राजस्थान में संगठन विस्तार पर जोर
अठावले ने बताया कि पार्टी राजस्थान के सभी 35 जिलों में अपना संगठन मजबूत कर रही है। पंचायत चुनाव के जरिए पार्टी गांव स्तर तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में मजबूत उपस्थिति भविष्य की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।
क्या बदलेगा चुनावी गणित?
राजस्थान में अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक लंबे समय से कांग्रेस, भाजपा और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के बीच बंटता रहा है। ऐसे में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) की सक्रिय एंट्री कई क्षेत्रों में चुनावी मुकाबले को बहुकोणीय बना सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी भाजपा के साथ प्रभावी तालमेल बनाती है, तो इसका असर कई पंचायतों और स्थानीय निकायों के चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
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दूरगामी रणनीति का संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव में उतरने का फैसला केवल स्थानीय निकायों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान में पार्टी का संगठनात्मक आधार तैयार करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के सहयोग से रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पहचान बनाने में कितनी सफल होती है।



