Rajasthan SI Recruitment 2021 Cancelled: जयपुर। राजस्थान की बहुचर्चित एसआई भर्ती 2021 को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हजारों युवाओं के सपनों पर बड़ा झटका दे दिया है। पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और भर्ती में फर्जीवाड़े के आरोपों के बीच लंबे समय से विवादों में घिरी इस भर्ती को अब पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भर्ती रद्द करते हुए अंतिम मुहर लगा दी है।
फैसले के बाद जयपुर के शहीद स्मारक पर भावुक और गुस्से से भरे अभ्यर्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी। वहां का माहौल बेहद दर्दनाक दिखाई दिया। कई अभ्यर्थी और उनके माता-पिता रोते नजर आए। किसी ने अपनी जमीन बेचकर बच्चों को पढ़ाया था, तो किसी ने कर्ज लेकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करवाई थी। अब वही परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर भर्ती में कुछ लोग दोषी पाए गए हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए, लेकिन हजारों निर्दोष युवाओं का भविष्य क्यों बर्बाद किया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सवाल उठाया कि जब जांच एजेंसियों ने करीब 64 लोगों को गिरफ्तार किया है, तो बाकी चयनित उम्मीदवारों को दोषी कैसे मान लिया गया। उनका कहना है कि सरकार और जांच एजेंसियां असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने में नाकाम रहीं और आसान रास्ता अपनाते हुए पूरी भर्ती ही रद्द कर दी गई।
इस फैसले के बाद युवाओं का दर्द सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं है। कई अभ्यर्थियों की उम्र अब सरकारी नौकरी की सीमा के करीब पहुंच चुकी है। कुछ की शादी हो चुकी है, तो कई परिवार आर्थिक संकट में फंस गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पांच-पांच साल तक दिन-रात मेहनत की, किराए के कमरों में रहकर तैयारी की और अब फिर से उसी संघर्ष में लौटना उनके लिए आसान नहीं होगा। इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। हनुमान बेनीवाल को लेकर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वहीं आमेर से पूर्व विधायक प्रत्याशी गोरू सिंह देवल ने कहा कि दोषियों को फांसी दो, लेकिन निर्दोष युवाओं को सजा मत दो। दूसरी तरफ थावरचंद डामोर ने भी युवाओं के समर्थन में आवाज उठाते हुए सीएमओ के घेराव की चेतावनी दी है।
यह मामला अब सिर्फ एक भर्ती तक सीमित नहीं रह गया है। राजस्थान में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती विवादों ने युवाओं के बीच सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर कुछ महीनों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद और फिर युवाओं का सड़क पर उतरना अब एक आम तस्वीर बनती जा रही है।



