चंडीगढ़। पंजाब में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Ashok Mittal से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उनका कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विरोधी दलों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत चल रही जांच का हिस्सा है। मित्तल हाल ही में राज्यसभा में अपनी पार्टी के उपनेता बनाए गए हैं और वे फगवाड़ा स्थित एक निजी विश्वविद्यालय से भी जुड़े हैं। इस कारण यह कार्रवाई और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर गई है।
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने भी केंद्र पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनावी फायदे के लिए जांच एजेंसियों का सहारा ले रही है, लेकिन राज्य की जनता इस रणनीति को समझती है और इसका जवाब देगी। पार्टी के अन्य नेताओं और मंत्रियों ने भी इसी तरह के आरोप लगाए और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
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दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। केंद्रीय मंत्री Ravneet Singh Bittu ने पलटवार करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में कई मामलों की जांच चल रही है।
भाजपा की पंजाब इकाई के अध्यक्ष Sunil Jakhar ने भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती, तो केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई और उस पर उठे राजनीतिक विवाद से साफ है कि राज्य में चुनावी माहौल अभी से गर्माने लगा है।



