बाड़मेर/पचपदरा। राजस्थान के बाड़मेर स्थित पचपदरा रिफाइनरी, जिसे देश की सबसे सुरक्षित और ‘स्मार्ट’ रिफाइनरी माना जाता है, वहां लगी भीषण आग ने सुरक्षा विशेषज्ञों के होश उड़ा दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो रिफाइनरी अत्याधुनिक सेंसर और ऑटोमेटेड फायर अलार्म सिस्टम से लैस है, वहां आग लगने से पहले ‘डेंजर सायरन’ क्यों नहीं बजा? सूत्रों के मुताबिक, सेंसर हाइड्रोकार्बन के रिसाव को पकड़ने में नाकाम रहे, जिसके बाद एनआईए की टीम ने विशेष हेलीकॉप्टर से मौके पर पहुंचकर जांच की कमान संभाल ली है।
NIA की जांच के 3 ‘क्रिटिकल’ एंगल
मैनुअल छेड़छाड़ और ‘इनसाइडर थ्रेट’ (Insider Threat)
जांच दल का सबसे ज्यादा ध्यान क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) के हीट एक्सचेंजर सर्किट पर है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि वाल्व से हाइड्रोकार्बन का रिसाव हुआ था। एनआईए अब यह पता लगा रही है कि क्या यह रिसाव किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या किसी ने जानबूझकर वाल्व के साथ छेड़छाड़ की थी। रिफाइनरी में काम करने वाले इंजीनियरों, ठेका श्रमिकों और सुरक्षा गार्डों की ‘बैकग्राउंड प्रोफाइलिंग’ शुरू कर दी गई है ताकि किसी भी भीतरघाती साजिश का पर्दाफाश हो सके।
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डिजिटल हैकिंग और साइबर हमला (Cyber Attack Theory)
पचपदरा रिफाइनरी का पूरा संचालन SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम के जरिए होता है। एनआईए यह देख रही है कि क्या किसी बाहरी हैकर ने रिफाइनरी के डिजिटल फायरवॉल को तोड़कर कंट्रोल रूम के कमांड लॉग्स को बदला था? क्या वाल्व का प्रेशर बढ़ाने या उसे लीक करने के लिए कोई ‘रिमोट कमांड’ दिया गया था? इसके लिए नेटवर्क सिक्योरिटी डेटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।
ग्लोबल सैबोटेज पैटर्न (Global Sabotage Pattern)
पिछले कुछ समय में दुनिया के अलग-अलग देशों (जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और मैक्सिको) की रिफाइनरियों में रहस्यमय आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। एनआईए इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या पचपदरा की यह आग भी उसी ‘वैश्विक पैटर्न’ का हिस्सा तो नहीं? हालांकि, अभी तक किसी विदेशी साजिश के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन एजेंसी किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रही है।
हाईटेक विफलता: आग लगने के बाद क्यों बजा अलार्म?
रिफाइनरी की सुरक्षा का दावा यह था कि यहां एक बूंद तेल का रिसाव होते ही सेंसर एक्टिव हो जाएंगे। लेकिन हकीकत में, अलार्म तब बजा जब आग की लपटें आसमान छूने लगी थीं। इस ‘प्रोटोकॉल फेलियर’ ने पूरे मैनेजमेंट को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एनआईए की फॉरेंसिक टीम यह भी जांच रही है कि क्या सुरक्षा अलार्म सिस्टम को जानबूझकर ‘डिसेबल’ या ‘बाईपास’ किया गया था।
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वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियां
फिलहाल रिफाइनरी परिसर में भारी सुरक्षा बल तैनात है और एनआईए की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। देश के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में हुई यह चूक केवल एक आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह भविष्य के बड़े ऊर्जा संकट की चेतावनी भी हो सकती है। रिफाइनरी प्रशासन ने अब अपनी सुरक्षा ऑडिट को और सख्त कर दिया है, लेकिन असली खुलासा एनआईए की फाइनल रिपोर्ट के बाद ही होगा।



