जयपुर/टोंक। राजस्थान की सियासत में ‘मिशन 2028’ का बिगुल फूँक दिया गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने पहले राजस्थान दौरे के लिए सचिन पायलट के अभेद्य दुर्ग ‘टोंक’ को चुनकर साफ़ कर दिया है कि आगामी चुनावों में मुकाबला आर-पार का होगा। इस दौरे ने न केवल नई रणनीतियों को जन्म दिया है, बल्कि एक ऐसी ज़ुबानी जंग छेड़ दी है जिसने प्रदेश के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।
नितिन नबीन का ‘गुप्त मंत्र’ और मिशन 2028
नितिन नबीन का टोंक से दौरे की शुरुआत करना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। जानकारों की मानें तो नबीन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘सेना’ को वो ‘गुप्त राज’ बताया है जिससे राजस्थान में फिर से बीजेपी की सरकार रिपीट होगी। नबीन का मंत्र साफ है— “पायलट के प्रभाव को उनके ही घर में चुनौती देना।”
बीजेपी की नज़र पूर्वी राजस्थान की उन 8 सीटों पर है, जहां सचिन पायलट का जादू चलता है। नबीन ने नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पायलट की ‘वफादारी’ और उनके ‘बाहरी’ (UP निवासी) होने के मुद्दे को घर-घर तक ले जाएं। बीजेपी का लक्ष्य पायलट को ‘अस्थिर’ साबित कर जनता के भरोसे को हिलाना है, ताकि ‘एकतरफा बहुमत’ का रास्ता साफ हो सके।
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‘बहुरूपिया’ बयान पर छिड़ा सियासी घमासान
बवाल तब शुरू हुआ जब बीजेपी प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने पायलट को ‘बहुरूपिया’ और ‘बाहरी’ कह डाला। उन्होंने यहाँ तक तंज कसा कि पायलट की एक टांग कांग्रेस में है और दूसरी का ठिकाना नहीं। अग्रवाल ने कहा, “मैं भी यूपी से हूं, लेकिन यहां विधायक बनने का सपना नहीं देख सकता। आपने यहां कैसी परंपरा शुरू कर दी है कि किसी भी राज्य के व्यक्ति को स्वीकार कर लेते हैं?”
पायलट का ‘टर्की’ जवाब और मर्यादा की सीख
सचिन पायलट ने इन निजी हमलों का जवाब बेहद शालीनता और मुस्कराहट के साथ दिया। पायलट ने पलटवार करते हुए कहा, “पता नहीं अग्रवाल जी मुझसे इतना ‘विशेष प्रेम’ क्यों रखते हैं? मिलेंगे तो ज़रूर पूछूंगा कि आखिर बात क्या है।” उन्होंने बीजेपी को नसीहत देते हुए कहा कि विरोधियों को कभी कम नहीं आंकना चाहिए और राजनीति मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए, कीचड़ उछालने पर नहीं।
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अशोक गहलोत का ‘कवच’ और मदन राठौड़ का तंज
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिया। जो गहलोत कभी पायलट पर हमलावर रहते थे, आज वे उनके बचाव में ‘सुरक्षा कवच’ बनकर खड़े हैं। गहलोत ने कहा कि पायलट अब समझ गए हैं और दोबारा मानेसर जैसी गलती नहीं करेंगे।
हालांकि, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि गहलोत आज भी पायलट को ‘बच्चा’ समझते हैं, और उनका यह बयान पायलट का सम्मान नहीं बल्कि अपमान है। राठौड़ ने ‘बहुरूपिया’ शब्द का बचाव करते हुए तर्क दिया कि यह पायलट के सौम्य और रौद्र रूपों को दर्शाता है, इसमें कुछ भी नकारात्मक नहीं है। राजस्थान की ये जंग अब मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत हमलों और ‘वर्चस्व की लड़ाई’ पर आ गई है। क्या नितिन नबीन का मिशन 2028 सफल होगा? या कांग्रेस की ये नई एकजुटता बीजेपी के अरमानों पर पानी फेर देगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।



