INDIA Bloc Meeting Highlights: विपक्षी गठबंधन इंडिया की सोमवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक हुई. गठबंधन ने नीट और सीबीएसई परीक्षा विवादों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है. साथ ही चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और “वोट लूट” के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखने का फैसला किया है.

ढाई घंटे चली बैठक, कई मुद्दों पर बनी सहमति
नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित करीब ढाई घंटे की बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद, एनसीपी (शरद पवार गुट) समेत 22 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक में नीट-यूजी परीक्षा, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे.

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में युवाओं के साथ “विश्वासघात” हुआ है. इसी वजह से इंडिया गठबंधन ने सर्वसम्मति से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है.
CJI को भेजा जाएगा पत्र
खरगे ने बताया कि गठबंधन मतदाता सूची में कथित हेरफेर, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजेगा. विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.

हर दो महीने में होगी बैठक
इंडिया गठबंधन ने संगठनात्मक मजबूती पर भी जोर दिया. नेताओं ने फैसला किया कि गठबंधन की बैठक अब हर दो महीने में आयोजित की जाएगी. अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में होगी.
सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
विपक्ष ने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी की है. साथ ही संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच रोजाना समन्वय बैठक करने का निर्णय लिया गया है. बैठक के जरिए इंडिया गठबंधन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह आगामी राजनीतिक और संसदीय लड़ाइयों में एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ रणनीति बनाएगा.

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