नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन कार्यक्रम को नई दिशा मिलती नजर आ रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) ने कावेरी 2.0 इंजन को नए सिरे से विकसित करने की दिशा में काम तेज किया है। इसका उद्देश्य भविष्य में तेजस लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल हो रहे अमेरिकी GE F404 इंजनों पर निर्भरता कम करना है।
रिपोर्टों के मुताबिक, कावेरी 2.0 के लिए करीब 90 किलो न्यूटन श्रेणी का नया इंजन कोर तैयार करने की योजना है। इसमें हाई-प्रेशर कंप्रेसर सहित इंजन के प्रमुख हिस्सों को नए डिजाइन के साथ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही उच्च तापमान पर बेहतर प्रदर्शन के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की योजना है। कावेरी इंजन कार्यक्रम की शुरुआत तेजस को स्वदेशी शक्ति देने के उद्देश्य से हुई थी। हालांकि, शुरुआती इंजन आवश्यक थ्रस्ट और वजन संबंधी मानकों को पूरा नहीं कर पाया।
इसके बाद तेजस के लिए GE F404 इंजन का इस्तेमाल किया गया और मूल कावेरी कार्यक्रम को LCA से अलग कर दिया गया। अब बदली हुई परिस्थितियों में स्वदेशी इंजन को दोबारा विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर विदेशी इंजन की आपूर्ति में सामने आ रही देरी ने भारत के लिए स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता विकसित करने की रणनीतिक जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है। GE F404 फिलहाल तेजस विमान परिवार के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रमुख इंजन है।
हालांकि, कावेरी 2.0 को तत्काल तेजस में लगाया जाना संभव नहीं माना जा रहा है। विमान के मौजूदा डिजाइन और इंजन एकीकरण को देखते हुए नए इंजन के लिए व्यापक परीक्षण, प्रमाणन और आवश्यक बदलावों की जरूरत होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका संभावित इस्तेमाल तेजस के भविष्य के मिड-लाइफ अपग्रेड के दौरान किया जा सकता है। स्वदेशी इंजन विकसित होने से भारत को लड़ाकू विमानों के लिए विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही इससे देश की एयरोस्पेस तकनीक, इंजन निर्माण क्षमता और रक्षा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
कावेरी 2.0 की सफलता भारत के लिए केवल तेजस कार्यक्रम तक सीमित उपलब्धि नहीं होगी। भविष्य में विकसित होने वाले अन्य लड़ाकू विमान और मानव रहित लड़ाकू प्लेटफॉर्म भी स्वदेशी इंजन तकनीक से लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इस परियोजना की वास्तविक सफलता इंजन के परीक्षण, प्रदर्शन और अंतिम प्रमाणन के बाद ही तय होगी।



