टोंक। राजस्थान की राजनीति के बेबाक नेता और भगत सिंह सेना (BSS) के सुप्रीमो नरेश मीणा (Naresh Meena) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बुधवार देर रात टोंक के घाड़ थाने में उस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब नरेश मीणा पुलिस की कथित संवेदनहीनता के खिलाफ थाने के भीतर ही धरने पर बैठ गए। मामला एक सड़क हादसे में घायल युवक को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने से जुड़ा था।
शादी से लौटते वक्त देखा दर्दनाक मंजर
जानकारी के अनुसार, नरेश मीणा दूनी क्षेत्र के मुकलाना गांव में एक शादी समारोह में शामिल होकर नगरफोर्ट की ओर लौट रहे थे। रात करीब 9 बजे घाड़ थाने से महज 50 मीटर की दूरी पर उन्होंने भीड़ और सड़क पर लहूलुहान हालत में पड़े एक बाइक सवार को देखा। घायल की पहचान दूनी निवासी भागचंद मिस्त्री के रूप में हुई, जो सड़क पर अचानक सांड आने से दुर्घटना का शिकार हो गया था।
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‘मरता है तो मरने दो’-पुलिस के बयान पर फूटा गुस्सा
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने नरेश मीणा को बताया कि उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने घायल को अस्पताल पहुंचाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। आरोप है कि थाने में मौजूद पुलिसकर्मी ने ग्रामीणों से यहां तक कह दिया कि ‘हमारे पास कोई जीप नहीं है, मरता है तो मरने दो, मैं क्या करूं?’ पुलिस के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये को देख नरेश मीणा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तुरंत अपनी साफी (पगड़ी) उतारी और घायल युवक के सिर पर बांधी ताकि खून बहना रुक सके।
थाने में धरना और एसपी का हस्तक्षेप
घायल को तत्काल इलाज दिलाने और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर नरेश मीणा थाने में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने तुरंत टोंक एसपी को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी और थाने की लापरवाही बताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तुरंत आदेश जारी किए, जिसके बाद महज 10 मिनट के भीतर पुलिस ने गाड़ी की व्यवस्था की और घायल भागचंद को दूनी अस्पताल भिजवाया।
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मदद के बाद खत्म किया धरना
घायल युवक के सुरक्षित अस्पताल पहुंचने और पुलिस प्रशासन द्वारा सक्रियता दिखाने के बाद नरेश मीणा ने अपना धरना समाप्त किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जनता की सुरक्षा पुलिस की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद वे अपने साथियों के साथ गंतव्य के लिए रवाना हुए।



