Ashok Gehlot News : जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूर्व विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) लोकेश शर्मा ने वर्ष 2020 और 2022 के राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर गहलोत की हालिया व्याख्या पर सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में शर्मा ने कहा कि इन घटनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू अब भी स्पष्ट नहीं हैं और तथ्यों पर गंभीरता से पुनर्विचार किए जाने की आवश्यकता है। शर्मा ने कहा कि गहलोत की व्याख्या में कई पहलू अनसुलझे हैं और उनसे जुड़े तथ्यों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। गौरतलब है कि वर्ष 2020 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपने समर्थक विधायकों के साथ गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी, जिसके चलते करीब एक महीने तक राजनीतिक संकट बना रहा। बाद में कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप से मामला सुलझा लिया गया था।
इसके बाद सितंबर 2022 में जयपुर में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें यह तय होना था कि यदि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाते हैं तो राजस्थान की सरकार का नेतृत्व कौन करेगा। हालांकि, उस समय गहलोत समर्थक विधायकों ने बैठक में भाग नहीं लिया था और पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के किसी भी प्रयास का विरोध किया गया था। अशोक गहलोत ने हाल ही में कहा था कि 25 सितंबर 2022 को हुई घटनाएं पार्टी आलाकमान के खिलाफ विद्रोह नहीं थीं। उन्होंने यह भी कहा था कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने की स्थिति में थे, लेकिन परिस्थितियों ने ऐसी स्थिति पैदा की कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि वे सोनिया गांधी के समक्ष इस बात के लिए खेद व्यक्त कर चुके हैं कि सीएलपी बैठक में प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। वहीं, भाजपा पर आरोप लगाते हुए गहलोत ने कहा था कि 2020 में उनकी सरकार को गिराने की साजिश रची गई थी, जिसमें पायलट और कुछ विधायकों का इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकेश शर्मा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि गहलोत को वास्तव में यह विश्वास था कि भाजपा नेताओं ने सरकार गिराने की साजिश की थी, तो उस समय उन्होंने इस पर स्पष्ट आपत्ति क्यों नहीं जताई।
शर्मा ने कहा कि 2020 में जब बागी विधायकों के लौटने के संकेत मिले थे, तब गहलोत और उनके समर्थकों ने कोई आपत्ति नहीं की थी। उन्होंने यह भी कहा कि 2022 में गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार थे और उस समय नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने पर्यवेक्षकों को जयपुर भेजा था। शर्मा के अनुसार, गहलोत को पर्यवेक्षकों के आगमन की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बजाय जयपुर में विधायकों के माध्यम से असंतोष का माहौल बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री निवास के बजाय वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल के आवास पर एकत्र हुए और बाद में उन्हें तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी के आवास पर भेजा गया, जहां उन्होंने कथित रूप से पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के विरोध में इस्तीफे सौंपे।
शर्मा ने यह भी दावा किया कि यह कदम पर्यवेक्षकों को विधायकों से व्यक्तिगत बातचीत करने से रोकने के लिए उठाया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहता था, इसलिए उन पर किसी प्रकार की साजिश का आरोप सही नहीं है। शर्मा ने सवाल उठाया कि यदि यह मामला केवल पायलट के खिलाफ असहमति का था, तो कांग्रेस नेतृत्व द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षकों का विरोध क्यों किया गया।



