जयपुर। राजस्थान के टोंक जिले में पेयजल संकट अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। भगत सिंह सेना (BSS) के प्रमुख Naresh Meena ने देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने सोमवार को टोंक कलेक्टर Tina Dabi को ज्ञापन देने और इसके बाद अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने की घोषणा की है। इस ऐलान के बाद प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है। कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
“हारूं या जीतूं, जनता के साथ रहूंगा”
नरेश मीणा ने कहा कि उन्होंने 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा सीट से निर्दलीय उपचुनाव लड़ा था और उन्हें करीब 60 हजार वोट मिले थे। वे दूसरे स्थान पर रहे थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने जनता से वादा किया था कि जीत या हार से फर्क नहीं पड़ेगा, वे हमेशा क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहेंगे। मीणा के मुताबिक, पिछले एक महीने से वे गांव-गांव जाकर लोगों से मिल रहे हैं और हर जगह सबसे बड़ी समस्या पेयजल संकट की सामने आ रही है।
बीसलपुर बांध जिले में ही पानी की किल्लत
नरेश मीणा ने कहा कि सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बीसलपुर बांध टोंक जिले में स्थित है, लेकिन उसी जिले के कई इलाकों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। उन्होंने कहा कि जब गांवों में लगातार पानी की समस्या सामने आ रही है तो जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे लोगों की आवाज उठाएं।उन्होंने बताया कि सोमवार को पहले कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा और फिर दोपहर 12 बजे से अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा।
क्या आमने-सामने होंगे नरेश मीणा और टीना डाबी?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा टोंक कलेक्टर Tina Dabi की भूमिका को लेकर हो रही है। हाल के दिनों में टीना डाबी रात्रि चौपाल, ग्रामीण समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक सक्रियता को लेकर लगातार सुर्खियों में रही हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या पानी के मुद्दे पर नरेश मीणा और टीना डाबी के बीच सीधा टकराव देखने को मिलेगा, या फिर प्रशासन आंदोलन शुरू होने से पहले ही समाधान निकालने की कोशिश करेगा।
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प्रशासन ने शुरू की तैयारियां
सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर आंदोलन की घोषणा के बाद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। अधिकारियों को किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह धरना लंबा चलता है तो यह सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि राजस्थान की राजनीति में बड़ा संदेश भी दे सकता है।
पानी का मुद्दा बनेगा नई राजनीति का केंद्र?
राजस्थान में पहले भी पानी और बिजली जैसे मुद्दों पर बड़े आंदोलन होते रहे हैं। ऐसे में नरेश मीणा का यह धरना आने वाले समय में नई राजनीतिक जमीन तैयार कर सकता है। फिलहाल टोंक में सबकी नजर सोमवार के घटनाक्रम पर टिकी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन मांगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह आंदोलन प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ लेकर आता है।



