जयपुर। Hanuman Beniwal Controversy: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल और सूबे की भजनलाल शर्मा सरकार के बीच की सियासी जंग अब बेहद आक्रामक और गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है। भैराणा धाम की महापंचायत में मुख्यमंत्री पर की गई तीखी टिप्पणी के बाद से ही शुरू हुआ यह विवाद अब सुरक्षा में कटौती, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और आधी रात को अधिकारियों के तबादले तक पहुंच गया है। राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि क्या यह सब महज एक प्रशासनिक संयोग है, या फिर राजस्थान की सियासत में किसी बड़े सियासी संग्राम की शुरुआत हो चुकी है?
भैराणा धाम की महापंचायत और वो तीखा बयान
दरअसल, इस पूरे विवाद की पटकथा पिछले दिनों नागौर के भैराणा धाम में लिखे गए बड़े आंदोलन के दौरान तैयार हुई थी। हनुमान बेनीवाल के जयपुर कूच के एलान के बाद सरकार और प्रशासन बैकफुट पर आए, वार्ता हुई और कई मांगों पर सहमति भी बनी। लेकिन समझौते से ज्यादा चर्चा मंच से दिए गए हनुमान बेनीवाल के बयानों की होने लगी। महापंचायत के मंच से बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनके मंत्रिमंडल को लेकर बेहद कड़े और तल्ख शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद पूरी भाजपा उनके खिलाफ लामबंद हो गई।
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बयान के बाद बड़ा एक्शन: बेनीवाल की सुरक्षा में कटौती
बयानबाजी के कुछ ही दिनों बाद सरकार की तरफ से एक बड़ा कदम उठाया गया। हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में तैनात 8 सुरक्षाकर्मियों में से 3 कमांडोज को अचानक वापस बुला लिया गया। वापस बुलाए गए तीनों सुरक्षाकर्मी जयपुर में बेनीवाल की सुरक्षा में तैनात थे। इन जवानों के पास अत्याधुनिक एके-47 (AK-47) जैसे हथियार थे।
सुरक्षा घटाने के पीछे चर्चा में हैं ये 3 बड़े कारण: तीखी बयानबाजी: मुख्यमंत्री और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बेनीवाल के लगातार आक्रामक तेवर।
ताबड़तोड़ आंदोलन: सचिवालय घेराव और जयपुर कूच जैसे कार्यक्रमों से प्रशासन पर लगातार दबाव बनाना।
युवाओं और किसानों पर मजबूत पकड़: कुछ ही घंटों में हजारों की भीड़ जुटा लेने की बेनीवाल की जमीनी ताकत।
बेनीवाल का पलटवार: सुरक्षा में कटौती पर हनुमान बेनीवाल ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “सरकार मेरी क्या सुरक्षा करेगी, जिसके साथ लाखों युवाओं का समर्थन हो, उसे किसी सरकारी सुरक्षा की जरूरत नहीं है। मैंने कभी सुरक्षा मांगी नहीं थी, सरकार ने खुद बढ़ाई थी और अब खुद ही कम कर दी, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
मदन राठौड़ को दिखाए काले झंडे, गरमाया कुचामन विवाद
इसी बीच इस सियासी आग में घी डालने का काम किया एक और घटनाक्रम ने। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान आरएलपी (RLP) कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने सख्त कार्रवाई की और आरएलपी नेता रामनिवास पोषक समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
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रात 1 बजे तहसीलदार का ट्रांसफर: प्रशासनिक फैसला या राजनीतिक दबाव?
इस कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब हिरासत में लिए गए आरएलपी कार्यकर्ताओं को कुचामन सिटी के तहसीलदार कैलाश ईनाणियां की अदालत से जमानत मिल गई। कार्यकर्ताओं को राहत मिलने के कुछ ही घंटों बाद— शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर तहसीलदार कैलाश ईनाणियां का तबादला सीधे बांसवाड़ा जिले के गांगड़ तलाई में कर दिया और उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त भी कर दिया गया।
जहां एक तरफ सरकारी स्तर पर इसे एक रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, वहीं आरएलपी समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक इसे कार्यकर्ताओं को जमानत देने की ‘सजा’ के तौर पर देख रहे हैं। इसके तुरंत बाद आरएलपी नेता रामनिवास पोषक और कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को एक दूसरे मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया, जिसने कार्यकर्ताओं के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
क्या आरएलपी बनाम बीजेपी की जंग होगी और तेज?
अब यह पूरा विवाद सिर्फ सुरक्षा में कटौती या काले झंडे दिखाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजस्थान की दो बड़ी राजनीतिक ताकतों के बीच की आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुका है। एक तरफ भाजपा सरकार कानून व्यवस्था और अनुशासन के नाम पर सख्त कदम उठा रही है, तो दूसरी तरफ हनुमान बेनीवाल और उनके समर्थक इसे राजनीतिक द्वेष की भावना से की गई कार्रवाई बता रहे हैं।



