जयपुर। Rajasthan Panchayat Election Update: राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और स्थानीय निकाय (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) के चुनावों को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहा सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म होता नजर आ रहा है। विपक्ष लगातार भजनलाल सरकार पर आरोप लगा रहा था कि सरकार चुनावों से भाग रही है और इन्हें जानबूझकर टाला जा रहा है। लेकिन अब, भजनलाल शर्मा सरकार के कद्दावर मंत्री ने इस पूरे सियासी विवाद पर विराम लगा दिया है। मंत्री के इस बड़े बयान के बाद राजस्थान के सियासी गलियारों में जबरदस्त हलचल शुरू हो गई है। सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि वह चुनावी रण में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
झाबर सिंह खर्रा का बड़ा एलान: ‘आयोग चाहे तो कल ही करा ले चुनाव’
जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवासन (UDH) और स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने चुनावों को लेकर सरकार के पत्ते खोल दिए। मंत्री खर्रा ने दो टूक शब्दों में कहा कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव करवाना राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) का स्वतंत्र और संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने सरकार का रुख साफ करते हुए कहा: “राज्य सरकार के हिस्से की सभी जिम्मेदारियां पूरी की जा चुकी हैं। चाहे वार्डों का परिसीमन (Delimitation) हो, पुनर्सीमांकन हो या अन्य कोई कानूनी औपचारिकताएं— सरकार अपना सारा काम पूरा कर चुकी है। अब गेंद पूरी तरह से निर्वाचन आयोग के पाले में है। अगर आयोग कल सुबह भी चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर दे, तो भजनलाल सरकार चुनाव करवाने के लिए 100% तैयार बैठी है।”
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देरी के आरोपों पर पलटवार, सरकार हर मोर्चे पर तैयार
मंत्री झाबर सिंह खर्रा के इस बयान से साफ है कि सरकार खुद पर लग रहे चुनाव टालने के आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को जो भी सहयोग चाहिए होगा, सरकार उसे हर स्तर पर उपलब्ध कराएगी। चाहे वह सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती हो, मतदान दलों के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी हो, या फिर चुनावी खर्च के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने हों— सरकार पूरी मुस्तैदी से तैयार है।
हाईकोर्ट की 31 जुलाई वाली डेडलाइन और चुनावी टाइमलाइन
इस पूरे मामले में माननीय राजस्थान हाईकोर्ट की भूमिका सबसे अहम रही है। दरअसल, चुनावों में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं (PIL) दायर की गई थीं। इन पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में जहां-जहां भी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव लंबित हैं, उन्हें 31 जुलाई तक हर हाल में संपन्न करवाया जाए। इसी कानूनी समय-सीमा (Dead Line) के दबाव के कारण इन दिनों सचिवालय से लेकर निर्वाचन आयोग के दफ्तरों तक बैठकों का दौर बेहद तेज हो चुका है।
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बस इस आखिरी प्रक्रिया का है इंतजार, फिर बजेगा चुनावी बिगुल!
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सब कुछ तैयार है, तो तारीखों का एलान क्यों नहीं हो रहा? दरअसल, चुनावों के रास्ते में अब सिर्फ एक आखिरी तकनीकी प्रक्रिया बाकी रह गई है। मंत्री खर्रा के मुताबिक, सरकार परिसीमन की अंतिम रिपोर्ट आयोग को सौंप चुकी है। अब सिर्फ तकनीकी रूप से वार्डवार मतदाता सूचियों (Voter Lists) का अंतिम प्रकाशन होना बाकी है। जैसे ही मतदाता सूचियों के प्रकाशन की यह अंतिम प्रक्रिया पूरी होगी, वैसे ही राजस्थान में चुनावी तारीखों की घोषणा का रास्ता साफ हो जाएगा। तारीखों के एलान के साथ ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो जाएगी।
गांव से लेकर शहर तक सजने लगा है सियासी रण
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पंचायत और निकाय चुनाव किसी भी सरकार और पार्टी के लिए लिटमस टेस्ट होते हैं, क्योंकि यहीं से जमीनी स्तर पर संगठन की असली ताकत का पता चलता है। यही वजह है कि बीजेपी, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल अभी से अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। झाबर सिंह खर्रा के बयान ने यह साफ कर दिया है कि अब उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और जुलाई से पहले-पहले राजस्थान में चुनावी रणभेरी बजने वाली है।



