West Bengal Census 2026 : कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) ने शुक्रवार को कहा कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार ने जनगणना अभियान के संबंध में केंद्र से मिले पत्र पर कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण देशव्यापी गणना प्रक्रिया की तैयारियों में राज्य अन्य राज्यों से पिछड़ गया। राज्य सचिवालय में जनगणना के पहले चरण पर बैठक की अध्यक्षता करने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में शुभेंदु ने दावा किया कि केंद्र ने पिछले साल फरवरी में तत्कालीन राज्य सरकार को जनगणना के लिए प्रारंभिक कार्य शुरू करने हेतु पत्र लिखा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा, पिछली सरकार ने राजनीतिक कारणों से जनगणना की प्रक्रिया शुरू नहीं की। तत्कालीन मुख्य सचिव भी राजनीतिक सहमति का इंतजार कर रहे थे।
पिछली सरकार ने जनगणना से संबंधित कोई भी कार्य नहीं किया : शुभेंदु
मुख्यमंत्री ने कहा, चूंकि पिछली सरकार ने जनगणना से संबंधित कोई भी कार्य नहीं किया, इसलिए अन्य राज्य काफी आगे निकल गए हैं जबकि हम पीछे रह गए हैं।स्थिति को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इस अंतर को पाटने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, कार्यभार संभालने के बाद, मैंने 11 मई को मुख्य सचिव की उपस्थिति में हुई पहली कैबिनेट बैठक में कई निर्णय लिए। उनमें जनगणना की प्रक्रिया शुरू करना भी शामिल था। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में जनगणना का कार्य एक अगस्त से शुरू होगा और अगले साल फरवरी के अंत तक जारी रहेगा।
शुभेंदु ने कहा कि जनगणना निदेशक रश्मि कोमल राज्य में इस पूरी कवायद की निगरानी करेंगी, और शुरुआती चरण के दौरान एक अगस्त से 15 अगस्त के बीच डेटा संग्रह किया जाएगा। बंगाल के मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने या सहायता प्राप्त करने के लिए दो टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए। उन्होंने कहा कि जनगणना पहली बार डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी। जनगणना प्रक्रिया में लगे सरकारी कर्मचारी एक विशेष मोबाइल ऐप का उपयोग करके डेटा एकत्र करेंगे और जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि ऐप विकसित करने का कार्य पूरा होने के करीब है। मुख्यमंत्री ने प्रक्रिया के महत्व पर जोर देते हुए कहा, ‘‘जनगणना का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक संवैधानिक दायित्व है।’’ उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रक्रिया का सुचारू संचालन कराने के लिए अधिकारियों के साथ सहयोग करें। सीमावर्ती क्षेत्रों का संदर्भ देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएएफ) को बाड़ लगाने के लिए आवश्यक भूमि प्रदान नहीं की थी, जिससे बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को रोकने के प्रयासों में बाधा आई। उन्होंने कहा, ‘‘बांग्लादेश के साथ लगी हमारी सीमा के 600 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ नहीं लगी है। चूंकि पिछली राज्य सरकार ने बीएसएफ को जमीन नहीं दी, इसलिए वहां बाड़ नहीं लगाई जा सकी, जिसके कारण घुसपैठ हुई और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में जनसांख्यिकी बदल गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि यह सीधे तौर पर जनगणना अभियान से संबंधित नहीं है, लेकिन यह गणना हमारे राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।’’



