कोलकाता/जयपुर। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। इस बार बंगाल के ‘खेला’ को राजस्थान के रणनीतिकारों ने अपने चक्रव्यूह में ऐसा उलझाया कि ममता दीदी का अभेद्य किला ढह गया। मारवाड़ की धरती से उठे इस राजनीतिक तूफान ने कोलकाता के सिंहासन को हिला कर रख दिया है।
प्रवासी राजस्थानियों का डंका: 5 सूरमाओं ने रचा इतिहास
बंगाल की राजनीति में इस बार प्रवासी राजस्थानियों की जबरदस्त धमक सुनाई दी। भाजपा ने सोची-समझी रणनीति के तहत 9 प्रवासी राजस्थानियों को मैदान में उतारा था, जिनमें से 5 उम्मीदवारों ने विधानसभा पहुंचकर इतिहास रच दिया है। ये वे नेता हैं जो वर्षों पहले राजस्थान से बंगाल जाकर बस गए और वहां की सक्रिय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
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जीत दर्ज करने वाले राजस्थान के लाल:
- विजय ओझा (जोड़ासांको): मूलतः बीकानेर के रहने वाले विजय ओझा 15 वर्षों से पार्षद थे, उन्होंने 5,797 वोटों से जीत हासिल की।
- भरत कुमार झंवर (बेलडांगा): इन्होंने 13,208 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
- अजय कुमार पोद्दार (कुल्टी): इन्होंने 26,498 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की।
- राजेश कुमार (जगद्दल): 20,909 वोटों से विजयी हुए।
- अशोक कीर्तनिया (बनगांव उत्तर): इन्होंने सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए 40,670 वोटों से विरोधियों को पटखनी दी।
भवानीपुर में ममता की हार: राजेंद्र राठौड़ का ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’
बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा। यहां भाजपा के सुवेंदु अधिकारी की जीत के पीछे राजस्थान के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र राठौड़ की टीम का हाथ था। राठौड़ के नेतृत्व में राजस्थान के 8 नेताओं की टीम ने माइक्रो-मैनेजमेंट के जरिए हर घर तक पहुंच बनाई और भाजपा के घोषणा पत्र की गारंटियों को महिलाओं और युवाओं तक पहुंचाया। जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी ने इन नेताओं को झुककर प्रणाम किया।
गजेंद्र सिंह शेखावत का ‘कहर’: 28 में से 26 सीटें भाजपा के नाम
उत्तर बंगाल की जिम्मेदारी संभाल रहे केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने चुनावी रण में ‘कहर’ बरपा दिया। कूचबिहार, दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी जैसे जिलों में सक्रिय शेखावत की रणनीति का असर यह रहा कि उनके हिस्से की 28 सीटों में से 26 पर भाजपा ने कब्जा किया। शेखावत ने इसे ‘अनुच्छेद 370’ हटने जैसा महत्वपूर्ण क्षण बताया और कहा कि यह जनादेश सुशासन और विकास के लिए है।
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राजस्थान की जीत, बंगाल का परिवर्तन
क्या अब बंगाल में विकास की नई गंगा बहेगी? राजस्थान के इन वीरों ने साबित कर दिया है कि मारवाड़ की रणनीति सात समंदर पार भी असर दिखाती है। इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद और अमित शाह की सटीक रणनीति को दिया जा रहा है।



