बालोतरा/जोधपुर। राजस्थान की सियासत और मारवाड़ के गलियारों से इस वक्त एक ऐसी खबर आ रही है जिसने सबको चौंका दिया है। मारवाड़ की फिजाओं में इस वक्त खौफ और साजिश की गंध तैर रही है। क्या कर्नल मानवेंद्र सिंह जसोल की जान को सच में खतरा है? अभी उनकी दूसरी शादी का विवाद शांत भी नहीं हुआ था कि ‘रेकी’ की खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया है।
रात के अंधेरे में पीछा और ‘श्री राम’ लिखी स्कॉर्पियो
घटना शुक्रवार रात की है जब कर्नल मानवेंद्र सिंह जसोल में एक कार्यक्रम से वापस लौट रहे थे। तभी गुजरात नंबर की एक सफेद स्कॉर्पियो उनकी कार के पीछे लग गई। चौंकाने वाली बात यह है कि उस गाड़ी पर ‘श्री राम’ लिखा था और उसने एक-दो बार नहीं, बल्कि तीन बार कर्नल की कार को घेरा। कभी आगे तो कभी पीछे—साफ दिख रहा था कि बाकायदा रेकी की जा रही है।
हद तो तब हो गई जब अगली सुबह वही गाड़ी कर्नल के घर के बाहर भी मंडराती देखी गई। जानकारों का कहना है कि अगर बाड़मेर एसपी मुस्तैद न होते, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। हालांकि, इस मामले में बालोतरा पुलिस की ढिलाई पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं और मामला एडीजी प्रफुल कुमार और दिनेश एमएन तक पहुंच चुका है।
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दूसरी शादी का विवाद और समाज की नाराजगी
60 साल की उम्र में कर्नल साहब की दूसरी शादी ने पूरे राजस्थान में खलबली मचा दी थी। पहली पत्नी के निधन के बाद लिया गया यह फैसला समाज के एक धड़े को रास नहीं आया। राजपूत समाज में जसोल परिवार का एक बड़ा नाम और साख है, लेकिन इस व्यक्तिगत फैसले ने रिश्तों और समाज के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी है।
जानकारों की मानें तो परिवार और समाज के कुछ लोग इस शादी से बेहद नाराज चल रहे हैं। ऐसे में अब मारवाड़ के हर चौक-चौराहे पर यह सवाल गूंज रहा है कि क्या इस रेकी के तार इसी सामाजिक नाराजगी से जुड़े हैं? क्या यह गैंगस्टर्स की कोई रंजिश है या घर के ही किसी गुस्से का नतीजा?
सुरक्षा में चूक या किसी बड़े तूफान की आहट?
कर्नल मानवेंद्र सिंह जसोल आज दो पाटों के बीच फंसे नजर आ रहे हैं—एक तरफ पुलिस की लापरवाही और दूसरी तरफ समाज का गुस्सा। जसोल और बालोतरा के बीच सुरक्षा का यह लुका-छिपी का खेल किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा कर रहा है। खुद कर्नल साहब ने खुलासा किया है कि कोई उन पर लगातार नजर रख रहा है।
प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है, लेकिन सवाल वही है कि क्या पुलिस उस ‘रहस्यमयी स्कॉर्पियो’ और उसके पीछे के चेहरों तक पहुंच पाएगी? मारवाड़ की राजनीति का यह दिग्गज नेता अब अपने ही गढ़ में असुरक्षित महसूस कर रहा है।
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