UP Political News: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है. राजभर ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र सौंपा है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इस पत्र में आखिर क्या लिखा था उससे जुड़े किसी विवरण का खुलासा नहीं किया.
सपा पर बढ़ रहा दबाव: राजभर
राजभर ने अपने बयान में कहा कि समाजवादी पार्टी पर विभिन्न मामलों को लेकर दबाव लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट परियोजना से जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ने के साथ सपा की परेशानियां भी बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता जानती है कि इन मामलों के पीछे कौन लोग थे और जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सपा नेतृत्व की चिंता भी बढ़ती जा रही है.
समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होगी। राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है।
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) June 17, 2026
खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है।
महाराष्ट्र बंगाल छोड़िए, समूची सपा, भाजपा में…
महाराष्ट्र और बंगाल का भी किया जिक्र
सुभासपा प्रमुख ने दावा किया कि राजनीतिक हलचल केवल महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना बन रही है और सपा के कई नेता भाजपा के संपर्क में हैं. राजभर के अनुसार, “पूरी समाजवादी पार्टी भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार बैठी है.’ हालांकि राजभर के इन दावों पर फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. पार्टी नेतृत्व ने उनके आरोपों और दावों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से परहेज किया है.
यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल
राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि उनके दावों में सच्चाई है तो इसका असर राज्य की विपक्षी राजनीति पर पड़ सकता है. हालांकि, अभी तक राजभर द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और राजनीतिक हलकों में इसे सियासी बयानबाजी के तौर पर भी देखा जा रहा है.
ये भी पढ़ें: क्या ट्रंप-नेतन्याहू की दोस्ती में पड़ गई दरार? इजराइली प्रधानमंत्री की सार्वजनिक रूप से की आलोचना



