Tuesday, April 28, 2026
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मानेसर कांड पर महासंग्राम: गजेंद्र सिंह शेखावत का गहलोत पर बड़ा प्रहार, बोले- ‘पायलट तो सिर्फ मोहरा थे, असली डायरेक्टर गहलोत हैं’

मानेसर कांड पर राजस्थान में फिर सियासी भूचाल! केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अशोक गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा कि मानेसर ड्रामे के असली डायरेक्टर गहलोत ही थे और सचिन पायलट सिर्फ एक मोहरा। जानिये क्यों फिर चर्चा में आया 2020 का सियासी संकट और क्या है शेखावत का बड़ा दावा।

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में साढ़े चार साल पुराना ‘मानेसर कांड’ एक बार फिर ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। बीजेपी प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल के बयान से शुरू हुई चिंगारी अब केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच भीषण ‘जुबानी युद्ध’ में बदल गई है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अशोक गहलोत के उस बयान पर तीखा पलटवार किया है, जिसमें गहलोत ने सचिन पायलट को ‘समझदार’ और ‘कांग्रेस के प्रति वफादार’ बताया था।

शेखावत का आरोप: “गहलोत ही थे मानेसर ड्रामे के रचयिता”

केंद्रीय कला-संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि अशोक गहलोत जानबूझकर मानेसर की घटना को जीवित रखना चाहते हैं। शेखावत ने हमला बोलते हुए कहा, “मैंने उस वक्त भी कहा था और आज फिर कह रहा हूं—उस पूरी कहानी के रचयिता, कहानी के लेखक, पूरे ड्रामे के डायरेक्टर और उस ड्रामे का अंत करने वाले खुद अशोक गहलोत साहब ही थे।”

शेखावत ने सचिन पायलट का बचाव करते हुए उन्हें ‘मोहरा’ करार दिया। उन्होंने कहा, “सचिन पायलट तो मात्र एक मोहरा थे। गहलोत साहब आज भी उस मोहरे का इस्तेमाल अपना राजनीतिक वनवास खत्म करने के लिए कर रहे हैं। इसीलिए वे इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।”

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विवाद की जड़: राधा मोहन अग्रवाल का ‘एक टांग’ वाला बयान

इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई जब बीजेपी प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने टोंक में सचिन पायलट पर तंज कसते हुए कहा था कि “उनकी एक टांग कांग्रेस में रहती है और दूसरी टांग का पता नहीं कहां रहती है।”

इस पर अशोक गहलोत पायलट के ‘कवच’ बनकर सामने आए और कहा कि “पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में हैं। जो लोग हमारे लोगों को गुमराह कर मानेसर ले गए थे, उनके मन की मन में ही रह जाएगी। पायलट को अब अनुभव हो गया है कि गलती करने के क्या अंजाम होते हैं।”

क्यों चर्चा में आया दोबारा मानेसर कांड?

जुलाई 2020 में सचिन पायलट ने अपने समर्थक विधायकों के साथ तत्कालीन गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत की थी और मानेसर में बाड़ेबंदी की थी। उस समय गहलोत खेमे ने गजेंद्र सिंह शेखावत पर सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया था और कुछ ‘ऑडियो क्लिप’ जारी किए थे।

हालांकि, अब वक्त बदल चुका है। गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने खुद दिल्ली क्राइम ब्रांच में बयान दिया है कि वे ऑडियो टेप उन्हें अशोक गहलोत ने ही दिए थे। इसी मोड़ को आधार बनाकर शेखावत अब गहलोत को ही पूरे संकट का ‘मास्टरमाइंड’ बता रहे हैं।

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सियासी मायने: पायलट को ‘बच्चा’ या ‘मोहरा’ साबित करने की जंग

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी और गहलोत दोनों ही अपने-अपने तरीके से सचिन पायलट की छवि को प्रभावित करना चाहते हैं। जहां बीजेपी उन्हें ‘अस्थिर’ और ‘बाहरी’ बता रही है, वहीं गहलोत उन्हें ‘गलती सुधार चुका बच्चा’ बताकर उनके कद को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। शेखावत का यह बयान पायलट के प्रति सहानुभूति जताकर गुर्जर वोट बैंक और युवा वर्ग को साधने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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