Falta Seat Repoll : नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी हलचल के बीच बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। चुनावी धांधली के आरोपों के चलते फलता विधानसभा सीट पर 29 अप्रैल को हुई वोटिंग को रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने 21 मई को पुनर्मतदान कराने का फैसला किया है। इसी बीच मतदान से पहले राजनीतिक समीकरण अचानक बदल गए हैं। चुनाव प्रचार थमने से कुछ घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से अपने कदम पीछे खींच लिए। उनके इस फैसले ने राज्य की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
फलता सीट पर टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने मंगलवार दोपहर में चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया है। जहांगीर खान ने अनाउंसमेंट किया है कि अब वह चुनावी प्रक्रिया का भाग नहीं होंगे। जहांगीर खान के चुनावी मैदान छोड़ने से बीजेपी उम्मीदवार की सियासी राह जरूर आसान हो गई है, लेकिन हार जीत का फैसला 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान के जरिए ही तय होगा। ऐसे में जहांगीर खान के चुनावी मैदान से पीछे हटने से क्या सियासी सीन बनेगा?

अब किसके पक्ष में जाएगा माहौल
पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर सियासी मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर पिछले 15 वर्षों से पार्टी का दबदबा कायम था, लेकिन बदले राजनीतिक माहौल ने अब यहां के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। फलता सीट से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान का मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी देबांग्शु पांडा से माना जा रहा था। हालांकि, चुनाव प्रचार खत्म होने से ठीक पहले जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर सभी को चौंका दिया।
दरअसल, 29 अप्रैल को फलता सीट पर हुए मतदान के दौरान धांधली के आरोप लगे थे, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने वोटिंग रद्द कर 21 मई को पुनर्मतदान कराने का फैसला किया। इसी बीच 4 मई को आए चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति का पूरा माहौल बदल दिया। सीएम ममता बनर्जी की सत्ता से विदाई और बीजेपी सरकार बनने के बाद फलता सीट पर भी राजनीतिक दबाव बढ़ गया, जिससे जहांगीर खान की राह मुश्किल मानी जा रही थी। हालांकि जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से कदम पीछे खींच लिए हैं, लेकिन 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इस सीट पर सीपीएम के शंभू कुर्मी और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक भी चुनावी मैदान में मौजूद हैं। ऐसे में जहांगीर खान के हटने से बीजेपी की राह भले आसान नजर आ रही हो, लेकिन अंतिम फैसला पुनर्मतदान के नतीजों से ही होगा।
सत्ता बदलते ही फलता में बदले चुनावी समीकरण
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद फलता विधानसभा सीट का सियासी माहौल पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। सीएम ममता बनर्जी की सत्ता से विदाई और बीजेपी सरकार बनने के बाद इस सीट पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पुनर्मतदान से पहले पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से कराया जा सके। फलता सीट को बीजेपी ने प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है। राज्य की कमान संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने खुद इस सीट की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली है। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा के समर्थन में विशाल रैली कर चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया।
रैली के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी नेता जहांगीर खान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “वह खुद को ‘पुष्पा’ कहता है, लेकिन अब इस ‘पुष्पा’ की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है।” शुभेंदु ने दावा किया कि फलता के लोगों ने पिछले 10 वर्षों में खुलकर मतदान नहीं किया, लेकिन इस बार जनता बिना किसी डर के वोट डालेगी और बीजेपी को रिकॉर्ड मतों से जीत दिलाएगी।



