Monday, May 11, 2026
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पश्चिम बंगाल CM सुवेंदु अधिकारी के PA की हत्या मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी, बिहार-यूपी से 3 शूटर गिरफ्तार

Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल की STF ने सीएम सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में बिहार और यूपी से 3 शूटर गिरफ्तार किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में हिस्ट्रीशीटर विशाल श्रीवास्तव भी शामिल है, जिस पर 15 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, टोल प्लाजा पर हुए UPI भुगतान और CCTV फुटेज जांच में अहम सुराग बने, जिनकी मदद से आरोपियों तक पहुंचा गया।

Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में बंगाल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. बंगाल पुलिस की STF ने इस मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार बदमाशों में एक हिस्ट्रीशीटर भी शामिल है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारियां बिहार और यूपी में संयुक्त कार्रवाई के दौरान की गईं. पुलिस जल्द ही पूरे मामले का खुलासा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर सकती है.

विशाल श्रीवास्तव पर 15 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज

मामले में गिरफ्तार हिस्ट्रीशीटर की पहचान विशाल श्रीवास्तव के रूप में हुई है. उसे बिहार के बक्सर जिले के पांडे पट्टी गांव से पकड़ा गया. बताया जा रहा है कि विशाल श्रीवास्तव पर हत्या, लूट, डकैती समेत 15 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. इस कार्रवाई को बिहार पुलिस, बक्सर पुलिस और बिहार STF के सहयोग से अंजाम दिया गया.

2 अन्य आरोपियों की भी हुई पहचान

बाकी अन्य 2 आरोपियों की पहचान राज सिंह और मयंक के रूप में हुई है. राज सिंह मूल रूप से बलिया का रहने वाला बताया गया है, लेकिन वह बक्सर में रह रहा था. वारदात के बाद वह अयोध्या में छिपा हुआ था, जहां संयुक्त ऑपरेशन में उसे गिरफ्तार किया गया.

UPI पेमेंट बना बड़ा सुराग

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच में पुलिस को डिजिटल पेमेंट से बड़ा सुराग मिला है. जांच अधिकारियों के मुताबिक, हत्या में इस्तेमाल की गई संदिग्ध कार वारदात से कुछ समय पहले बल्ली टोल प्लाजा से गुजरी थी, जहां टोल टैक्स का भुगतान UPI के जरिए किया गया था. इसी UPI ट्रांजैक्शन के जरिए जांचकर्ताओं को एक संदिग्ध से जुड़े मोबाइल नंबर की पहचान करने में मदद मिली. यह डिजिटल सुराग जांच में अहम साबित हुआ.

पुलिस ने बताया कि टोल प्लाजा के CCTV कैमरों में संदिग्ध वाहन, उसमें सवार लोग और उनकी गतिविधियां रिकॉर्ड हुई थीं. इन्हीं फुटेज और मोबाइल डेटा के आधार पर जांच एजेंसियां आरोपियों तक पहुंचने में सफल रहीं.

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Premanshu Chaturvedi
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