Friday, October 9, 2026
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राजस्थान कांग्रेस में फिर घमासान: विश्वेंद्र सिंह बोले- पार्टी राम भरोसे, नेताओं को बताया अपनी ही डाल काटने वाला

पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा- प्रदेश में कांग्रेस का कोई धणी-धोरी नहीं, पार्टी राम भरोसे है। जानें डोटासरा पर आरोप, पार्टी छोड़ने के संकेत और अनुशासन समिति के नोटिस से जुड़ा पूरा मामला।

जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी कलह एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी के नेतृत्व और कार्यशैली पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने 60 साल तक देश पर राज किया, आज राजस्थान में उसका कोई धणी-धोरी नहीं है और पार्टी राम भरोसे चल रही है। उन्होंने पार्टी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि वे जिस डाल पर बैठते हैं, उसी को काटते हैं। विश्वेंद्र सिंह के इस बयान से राजस्थान कांग्रेस में सियासी हलचल बढ़ गई है। गौरतलब है कि करीब एक सप्ताह पहले भी उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। इसके बाद कांग्रेस की अनुशासन समिति ने उन्हें नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा था। हालांकि, विश्वेंद्र सिंह ने नोटिस का जवाब देने के बजाय सोशल मीडिया पर एक बार फिर अपनी नाराजगी जाहिर की।

‘मैंने हमेशा सही का साथ दिया’

विश्वेंद्र सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन और जनसेवा का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने इष्ट श्री गिरिराज धनी के सेवक हैं और हमेशा सही का साथ देते आए हैं। उन्होंने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता की आवाज को सर्वोपरि माना और विधायक, सांसद तथा मंत्री के रूप में मिली जिम्मेदारियों को ईमानदारी और निष्ठा से निभाया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह झूठ, फरेब और बेईमानी से दूर रहकर जनहित में काम करते रहे हैं और अंतिम सांस तक जनता की सेवा करते रहेंगे।

स्वाभिमान से समझौता नहीं करने की बात

पूर्व मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने पुरखों की मान-मर्यादा और विरासत को ध्यान में रखकर हमेशा फैसले किए हैं। उनके मुताबिक, जीवन में अंतरात्मा की आवाज सुनकर निर्णय लिए और अपने सिद्धांतों तथा आदर्शों पर कायम रहे। उन्होंने यह भी कहा कि वफादारी की कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन उन्होंने अपने स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया। विश्वेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं को लेकर कहा कि उनके दिल और घर के दरवाजे हमेशा खुले रहे हैं और आगे भी खुले रहेंगे। उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ते हुए कहा कि जनता का जो भी आदेश होगा, वह उसे स्वीकार करेंगे।

डोटासरा पर पहले भी लगा चुके हैं आरोप

विश्वेंद्र सिंह ने 30 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने रीट में कथित धांधली और आरएएस इंटरव्यू में अपने बेटे, बहू तथा रिश्तेदारों को कथित तौर पर 80-80 अंक दिलवाने के आरोप लगाए थे। उन्होंने इन आरोपों के आधार पर डोटासरा के इस्तीफे की मांग की थी और सरकार से जांच कराने की बात कही थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है। इसके अलावा, भरतपुर और डीग जिलों में शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस को बोर्ड नहीं मिलने पर भी विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेशाध्यक्ष और दोनों जिलों के कांग्रेस नेताओं को जिम्मेदार ठहराया था।

कांग्रेस छोड़ने के भी दिए थे संकेत

2 अक्टूबर को विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस छोड़ने के संकेत दिए थे। उन्होंने लिखा था कि वह अपनी मान-मर्यादा और स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकते और पार्टी की गलत रीति-नीति के साथ आगे नहीं चल पाएंगे। उनके लगातार सामने आ रहे बयानों ने पार्टी के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। हालांकि, उन्होंने अपने ताजा बयान में राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ने की बात कही है।

डोटासरा बोले थे- विश्वेंद्र सिंह वरिष्ठ नेता हैं

विश्वेंद्र सिंह के बयानों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 1 अक्टूबर को कहा था कि पार्टी में एकता है और यह बयानबाजी का समय नहीं है। 2 अक्टूबर को उन्होंने विश्वेंद्र सिंह को पार्टी का वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा था कि उनकी बात सुनी जाएगी और केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर कोई धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए। वहीं, महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सारिका सिंह चौधरी और कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने विश्वेंद्र सिंह के बयानों पर पलटवार किया था। कुछ नेताओं ने उन पर भाजपा के इशारे पर काम करने के आरोप भी लगाए थे।

अनुशासन समिति ने जारी किया था नोटिस

कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना ने 2 अक्टूबर को विश्वेंद्र सिंह को नोटिस जारी किया था। इसमें प्रदेशाध्यक्ष और जिला स्तर के नेताओं के खिलाफ बयानबाजी, निकाय चुनाव में पार्टी के लिए काम नहीं करने और संगठनात्मक गतिविधियों के प्रति उदासीनता जैसे आरोपों पर जवाब मांगा गया था। अब विश्वेंद्र सिंह के नए बयान के बाद राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजर है। बड़ा सवाल यही है कि पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को दूर कर पाएगा या कांग्रेस का अंदरूनी विवाद आने वाले दिनों में और गहराएगा।

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