जयपुर। हिंदी सिनेमा में अपनी दमदार एक्टिंग और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर का फिल्मी सफर संघर्ष, जुनून और कई दिलचस्प किस्सों से भरा रहा। थिएटर से शुरुआत करने वाले नाना ने अपनी मेहनत के दम पर इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई। ‘अंकुश’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया।
नाना पाटेकर से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जो उनके संघर्ष और जिंदगी के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाते हैं। इनमें बचपन की आर्थिक तंगी, शूटिंग के दौरान लगी चोट, फिल्मों के लिए उठाए गए जोखिम और साथी कलाकारों की मदद करने जैसे किस्से शामिल हैं।
13 साल की उम्र में पोस्टर पेंट कर कमाए 35 रुपये
नाना पाटेकर का बचपन आर्थिक मुश्किलों में बीता। रिपोर्ट के मुताबिक, जब वह करीब 13 साल के थे, तब उनके पिता के कारोबार में धोखाधड़ी के कारण परिवार को आर्थिक नुकसान हुआ। इसके बाद नाना ने परिवार की मदद के लिए काम करना शुरू किया।
वह दिन में स्कूल जाते और शाम को फिल्मों के पोस्टर पेंट करते थे। काम की जगह घर से करीब 8 किलोमीटर दूर थी। इस तरह वह रोजाना लगभग 16 किलोमीटर पैदल चलते थे। इसके बदले उन्हें हर महीने 35 रुपये मिलते थे।
फिल्म ‘अंकुश’ के लिए गिरवी रखा घर
साल 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘अंकुश’ नाना पाटेकर के करियर की अहम फिल्मों में से एक रही। फिल्म की शूटिंग के दौरान प्रोड्यूसर के पैसे खत्म हो गए और काम रुक गया।
रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म की कहानी और निर्देशक एन. चंद्रा पर भरोसा करते हुए नाना ने अपना घर गिरवी रखकर करीब 2 लाख रुपये जुटाए। इससे फिल्म का काम पूरा हो सका। फिल्म की सफलता के बाद निर्देशक ने उनका घर छुड़ाने में मदद की और उन्हें एक स्कूटर भी गिफ्ट किया।
‘परिंदा’ की शूटिंग में असली आग से झुलस गए थे नाना
साल 1989 में रिलीज हुई फिल्म ‘परिंदा’ के क्लाइमैक्स में नाना पाटेकर को आग की लपटों में घिरा दिखाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, शूटिंग के दौरान वह वास्तव में आग से झुलस गए थे।
निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा ने उन्हें सुरक्षा के लिए सावधानी बरतने को कहा था, लेकिन सीन के दौरान आग की लपटों से उनके हाथ-पैर की त्वचा झुलस गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और बताया जाता है कि वह करीब एक साल तक फिल्मों से दूर रहे।
शाहरुख खान की जमानत में की थी मदद
नाना पाटेकर और शाहरुख खान ने ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ और ‘शक्ति: द पावर’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1990 के दशक में एक मैगजीन में प्रकाशित खबर को लेकर शाहरुख खान विवाद में पड़ गए थे। मामला पुलिस तक पहुंचा और उन्हें गिरफ्तार किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, उस मुश्किल समय में नाना पाटेकर ने शाहरुख की जमानत की व्यवस्था कराने में मदद की थी।
परेश रावल ने सुनाया था बर्तनों वाला किस्सा
अभिनेता परेश रावल ने एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया था। उनके मुताबिक, नाना ने एक बार एक फिल्म प्रोड्यूसर को अपने घर बुलाया और उन्हें मटन खिलाया। खाना खाने के बाद नाना ने मजाकिया अंदाज में प्रोड्यूसर से बर्तन साफ करने को कहा।
परेश रावल ने इसी बातचीत में नाना की शख्सियत और उनके बेबाक अंदाज की तारीफ भी की थी।
जिंदगी में संघर्ष और निजी दुखों का सामना
नाना पाटेकर की जिंदगी में कई निजी दुख भी आए। रिपोर्ट के अनुसार, उनके बड़े बेटे दुर्वासा का निधन महज ढाई साल की उम्र में हो गया था। इस घटना ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया।
इसके अलावा, 1993 के मुंबई बम धमाकों में उन्होंने अपने भाई को भी खो दिया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि उनके भाई के हाथ में पहने कड़े से शव की पहचान की गई थी।
थिएटर से फिल्मों तक बनाया अलग मुकाम
नाना पाटेकर ने थिएटर में लंबे समय तक काम किया और बाद में फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अपहरण’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें दर्शकों के बीच खास जगह दिलाई।
उनके जीवन से जुड़े ये किस्से बताते हैं कि उनका सफर सिर्फ फिल्मों की सफलता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आर्थिक संघर्ष, जोखिम, निजी दुख और कई यादगार अनुभव भी शामिल रहे।



