Monday, August 24, 2026
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विरोध के आगे झुकी विजय सरकार, परंदूर एयरपोर्ट परियोजना से पीछे हटी

तमिलनाडु सरकार ने किसानों और ग्रामीणों के लंबे विरोध के बाद परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना से पीछे हटने का फैसला किया है। हालांकि चेन्नई में दूसरा एयरपोर्ट बनाने की योजना जारी रहेगी। सरकार अब कम विस्थापन और पर्यावरणीय नुकसान वाले किसी नए स्थान की तलाश करेगी।

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। स्थानीय लोगों और किसानों के लंबे विरोध के बीच सरकार ने इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। हालांकि, चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की योजना खत्म नहीं हुई है। सरकार अब इसके लिए किसी दूसरे स्थान की तलाश करेगी।

किसानों और ग्रामीणों का लंबे समय से विरोध

परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को लेकर आसपास के गांवों के लोग लंबे समय से विरोध कर रहे थे। स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता जमीन अधिग्रहण और कृषि भूमि के नुकसान को लेकर थी। कई ग्रामीणों को आशंका थी कि परियोजना के कारण उन्हें अपने घर और जमीन छोड़नी पड़ सकती है।

इसके अलावा प्रस्तावित क्षेत्र में जल निकायों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे। विरोध प्रदर्शनों के कारण परियोजना को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता गया।

चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की योजना जारी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि परंदूर परियोजना से पीछे हटने का मतलब चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की योजना को समाप्त करना नहीं है। चेन्नई में बढ़ते हवाई यातायात और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए दूसरे एयरपोर्ट की आवश्यकता बनी हुई है।

अब सरकार ऐसी जगह तलाशेगी जहां तकनीकी रूप से एयरपोर्ट बनाना संभव हो और स्थानीय लोगों, किसानों तथा पर्यावरण पर इसका प्रभाव कम से कम पड़े।

नई जगह के लिए होगा तकनीकी अध्ययन

मुख्यमंत्री के अनुसार, वैकल्पिक स्थान का चयन विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य ऐसी जगह चुनना है जहां बड़े पैमाने पर विस्थापन और कृषि भूमि के नुकसान जैसी समस्याएं न हों।

नई जगह तय करने के बाद ही एयरपोर्ट परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

लंबे विवाद के बाद बदला फैसला

परंदूर एयरपोर्ट को चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना लंबे समय से चर्चा में थी। लेकिन शुरुआत से ही स्थानीय विरोध इसके सामने बड़ी चुनौती रहा। किसानों और ग्रामीणों के लगातार आंदोलन के बीच सरकार ने अब परियोजना से पीछे हटने का फैसला किया है।

अब सबसे बड़ी चुनौती सरकार के सामने नया स्थान खोजने की होगी। चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत और स्थानीय विरोध के बीच संतुलन बनाना विजय सरकार के लिए आने वाले समय में अहम परीक्षा साबित हो सकता है।

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