नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले छात्र आंदोलन के बाद सरकार के साथ हुए समझौते को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि आंदोलन खत्म कराने के दौरान सरकार की ओर से जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, उन्हें अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपने आश्वासनों को पूरा नहीं किया तो एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
संगठन ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने के संबंध में सरकार से कई बार जानकारी मांगी गई, लेकिन अब तक संबंधित मामलों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। सीजेपी का दावा है कि आंदोलन समाप्त करने के लिए हुए समझौते में इन मामलों को लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।
संगठन के मुताबिक, सरकार की ओर से किए गए वादों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट प्रगति सामने नहीं आई है। सीजेपी ने कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद सरकार की तरफ से बातचीत या आगे की कार्रवाई के बारे में भी कोई ठोस पहल नहीं की गई। संगठन ने इसे युवाओं के साथ विश्वासघात बताया है।
24 अगस्त को तय होगी आगे की रणनीति
सीजेपी ने कहा है कि 24 अगस्त को बैठक कर आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। संगठन ने अपने समर्थकों, छात्रों और युवाओं से तैयार रहने की अपील की है। इसके साथ ही संकेत दिया गया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर जंतर-मंतर जैसे एक और बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से किए गए वादों का सम्मान होना चाहिए। उसके अनुसार, युवाओं से किया गया कोई भी समझौता केवल आंदोलन समाप्त होने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उसे व्यवहार में भी लागू करना होगा।
किन मुद्दों पर हुआ था समझौता
सीजेपी के अनुसार, जुलाई में एक महीने से अधिक समय तक चले आंदोलन के बाद सरकार ने उसकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई थी। इसके बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई थी। संगठन का दावा है कि आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई थी और अंततः उन्होंने पद छोड़ दिया।
सीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन में जान गंवाने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने सहित कई मुद्दों पर सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया था। संगठन अब इन सभी वादों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहा है।
सीजेपी ने कहा है कि सरकार यदि जल्द ही अपने आश्वासनों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती है तो युवाओं के बीच असंतोष और बढ़ सकता है। संगठन ने साफ किया कि वह आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों को अधूरा छोड़ने के पक्ष में नहीं है और जरूरत पड़ने पर फिर से सड़कों पर उतरने की तैयारी करेगा।



