नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर कानून व्यवस्था और सामाजिक तनाव को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। एक तरफ सहारनपुर में आजाद समाज पार्टी (ASP) के कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा घरों में रोके जाने का मामला सामने आया, तो दूसरी तरफ हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा के दौरान हुए विवाद ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया। इन दोनों घटनाओं के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
सहारनपुर में ASP कार्यकर्ताओं को घरों में रोका गया
सहारनपुर के नानौता क्षेत्र में ASP जिला उपाध्यक्ष अनिल रावण समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने उनके घरों में ही रोक दिया। बताया गया कि ये कार्यकर्ता लालावाला गांव में एक पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे। ASP नेताओं का दावा है कि परिवार उत्पीड़न और जानलेवा हमले का शिकार हुआ था और यह दौरा पार्टी प्रमुख Chandrashekhar Azad के निर्देश पर तय किया गया था।
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सुबह होते ही पुलिस ने अनिल रावण के घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और कार्यकर्ताओं को बाहर निकलने से रोक दिया। ASP नेताओं ने इसे असंवैधानिक बताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए। अनिल रावण ने कहा कि अगर इतनी पुलिस कानून व्यवस्था सुधारने में लगाई जाती तो ऐसी घटनाएं ही नहीं होतीं।
हापुड़ में शोभायात्रा के दौरान बढ़ा तनाव
इसी बीच हापुड़ के धौलाना थाना क्षेत्र के देहरा गांव में महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा के दौरान तनाव फैल गया। जानकारी के अनुसार महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम चल रहा था और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी दौरान एक हिंदू युवक और मुस्लिम दुकानदार के बीच कहासुनी हो गई।
शुरुआती बहस कुछ ही मिनटों में बड़े विवाद में बदल गई। इलाके में पत्थरबाजी, वाहनों में तोड़फोड़ और भगदड़ की स्थिति बन गई। घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया।
बताया गया कि कई वाहनों के शीशे तोड़े गए और कुछ स्थानों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इस घटना में छह लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक युवक की हालत गंभीर बताई गई।
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भारी पुलिस बल तैनात, दो गिरफ्तार
स्थिति बिगड़ने के बाद भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। मेरठ जोन के ADG Bhanu Bhaskar ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि हालात नियंत्रण में हैं। पुलिस ने दो लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
इसके साथ ही पुलिस ने 30 से ज्यादा वाहनों को कब्जे में लिया है और CCTV फुटेज की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक बयान और बढ़ता तनाव
इन घटनाओं के बाद विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में त्योहारों, जुलूसों और संवेदनशील मामलों के दौरान तनाव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। एक तरफ ASP कार्यकर्ताओं को रोकने का मामला राजनीतिक रंग ले रहा है, वहीं दूसरी तरफ हापुड़ की घटना ने सामाजिक तनाव को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
फिलहाल हापुड़ में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील कर रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है, या फिर उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक तनाव आने वाले समय में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।



