Saturday, May 30, 2026
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ट्रंप के दावे पर अमेरिकी रक्षा मंत्री की मुहर, हेगसेथ बोले- भारत-पाक संघर्षविराम में राष्ट्रपति ने निभाई थी अहम भूमिका

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि भारत ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया है। हेगसेथ ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार बताते हुए रक्षा सहयोग और सैन्य आधुनिकीकरण की सराहना की।

India Pakistan Peace Deal : सिंगापुर। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक क्षमता की सराहना करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित ‘शांगरी-ला डायलॉग’ को संबोधित करते हुए हेगसेथ ने कहा कि ट्रंप ने दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच शांति स्थापित करने की दिशा में प्रभावी नेतृत्व का परिचय दिया। हेगसेथ ने साथ ही भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का एक प्रमुख और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपनी सैन्य क्षमताओं का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और शक्ति संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

हम किसी भी देश पर उंगली नहीं उठा रहे हैं : पीट हेगसेथ

ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उन्होंने पिछले साल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक जारी रहे सैन्य संघर्ष के बाद शांति स्थापित करने में मदद की। हालांकि, भारत लगातार यही कहता रहा है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर हुआ था और उसने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को खारिज किया है। अमेरिकी मंत्री ने शनिवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही एक-दूसरे को सुरक्षा संबंधी चिंताओं के दृष्टिकोण से देखते रहेंगे। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि दोनों पक्ष (भारत और पाकिस्तान) एक-दूसरे की ओर से ऐसे खतरों को देखेंगे, जिन्हें समझा जा सकता है, हालांकि उनमें से कुछ को लेकर हमारा नजरिया अलग हो सकता है। देश आईसीबीएम (अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल) क्षमताएं विकसित करना चाहेंगे, लेकिन कम से कम हमारे वर्तमान दृष्टिकोण से, हम किसी भी देश पर उंगली नहीं उठा रहे हैं और न ही उन्हें अपने लिए खतरा बता रहे हैं।

हेगसेथ ने अंतरराष्ट्रीय स्थिरता में दोनों देशों के योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, हम उनके द्वारा विश्व भर में शांति को बढ़ावा देने में योगदान करने के लिए आभारी हैं। अपने संबोधन में हेगसेथ ने क्षेत्र के घटनाक्रमों पर चर्चा करते हुए पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व का जिक्र किया। उन्होंने कहा, मैंने यहां भारत का जिक्र किया है, लेकिन मैं उतनी ही आसानी से पाकिस्तान का भी उल्लेख कर सकता था और उस भूमिका का भी, जो फील्ड मार्शल तथा प्रधानमंत्री शांति वार्ताओं में निभा रहे हैं। पाकिस्तान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में मुख्य मध्यस्थ के रूप में उभरा है तथा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने का प्रयास कर रहा है। कई विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान दोनों का भरोसा हासिल है।

दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों ने पिछले महीने इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए मुलाकात की, लेकिन वे किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह शांति वार्ता के अगले दौर की मेजबानी बहुत जल्द करेंगे। सिंगापुर शिखर सम्मेलन में प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए हेगसेथ ने भारत की बढ़ती सैन्य और औद्योगिक क्षमताओं पर भी प्रकाश डाला और देश को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से उभरता महत्वपूर्ण सुरक्षा भागीदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपने सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण कर रहा है और विशेषकर हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत उच्च स्तरीय सैन्य अभियानों को बनाए रखने के लिए विशाल औद्योगिक क्षमता और साजो-सामान का निर्माण भी कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ सह-उत्पादन की भी प्रतिबद्धता जताई है।’’

हेगसेथ ने अमेरिका की व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए भारत पर ये टिप्पणी की, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी एक शक्ति इस क्षेत्र पर हावी न हो सके। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि एक ऐसा स्थिर संतुलन बने, जो अमेरिकियों के साथ-साथ हमारे सहयोगियों के लिए भी कारगर हो। एक ऐसा अनुकूल, लेकिन टिकाऊ, शक्ति संतुलन जिसमें चीन सहित कोई भी देश अपना वर्चस्व स्थापित न कर सके और अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा या समृद्धि को खतरे में न डाल सके। अमेरिकी विदेश मंत्री ने सहयोगी देशों और साझेदारों के बीच अधिक साझा जिम्मेदारी निभाने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा, धनी देशों की रक्षा के लिए अमेरिका द्वारा सब्सिडी देने का युग समाप्त हो गया है। हमें संरक्षित देशों की नहीं, बल्कि साझेदारों की आवश्यकता है। हम साझा जिम्मेदारी पर आधारित गठबंधन चाहते हैं, न कि निर्भरता पर।

हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं और सहयोगियों के साथ सहयोग को मजबूत करना जारी रखेगा। उन्होंने भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और फिलीपीन सहित कई हिंद-प्रशांत साझेदारों द्वारा की गई रक्षा प्रतिबद्धताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चीन के सैन्य निर्माण को लेकर चिंताओं के बावजूद अमेरिका चीन के साथ ‘‘टकराव’’ नहीं चाहता है। ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज’ द्वारा आयोजित एशिया का प्रमुख सुरक्षा मंच ‘शांगरी-ला डायलॉग’ क्षेत्र के सामने आने वाली रणनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए दुनिया भर के रक्षा मंत्रियों, सैन्य नेताओं और सुरक्षा अधिकारियों को एक साथ लाता है।

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Mukesh Kumar
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