वॉशिंगटन/तेहरान/यरूशलेम। दुनिया के सबसे अशांत क्षेत्र मिडिल ईस्ट से शांति की एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium)का पूरा भंडार अमेरिका को सौंपने पर राजी हो गया है। ट्रम्प के अनुसार, दोनों देश एक ऐतिहासिक शांति समझौते के बेहद करीब हैं और यदि यह डील फाइनल होती है, तो वे इसकी आधिकारिक घोषणा के लिए इस्लामाबाद (पाकिस्तान) की यात्रा भी कर सकते हैं।
ट्रम्प का बड़ा दावा: ‘ईरान अब झुकने को तैयार’
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत ‘बेहद सफल’ रही है। उन्होंने ईरान के यूरेनियम भंडार को ‘न्यूक्लियर डस्ट’ (परमाणु धूल) करार देते हुए कहा कि तेहरान इसे अमेरिका के हवाले करने को तैयार है। ट्रम्प ने जोर देकर कहा, ‘ईरान आज उन शर्तों पर बात करने को तैयार है, जिनके लिए वह दो महीने पहले राजी नहीं था।’ उन्होंने संकेत दिए कि समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया (IRIB) ने ट्रम्प के इन दावों को ‘हवाई किले’ बताते हुए उनका मजाक उड़ाया है और एक फारसी कहावत के जरिए इसे आधारहीन उम्मीद करार दिया है।
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इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम
एक अन्य बड़े घटनाक्रम में, इजराइल और लेबनान 10 दिनों के सीजफायर पर सहमत हो गए हैं। भारतीय समयानुसार यह युद्धविराम शुक्रवार तड़के 3:30 बजे से लागू हो गया है।
ट्रम्प की मध्यस्थता: राष्ट्रपति ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पुष्टि की कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइली पीएम नेतन्याहू से बात की, जिसके बाद यह सहमति बनी।
शर्तें: इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार होगा, लेकिन वह आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा। वहीं लेबनान सरकार को हिजबुल्लाह पर लगाम लगानी होगी।
परमाणु बम की दहलीज पर खड़ा ईरान?
विशेषज्ञों के अनुसार, परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम का ‘90% संवर्धन’ जरूरी है।
IAEA की रिपोर्ट: ईरान के पास वर्तमान में 5 से 6 टन संवर्धित यूरेनियम है।
खतरा: इसमें से करीब 120-130 किलोग्राम यूरेनियम ‘60% तक शुद्ध’ किया जा चुका है। यदि यह 90% तक पहुंचता है, तो ईरान परमाणु बम बना सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और इजराइल इसे अमेरिका को सौंपने का दबाव बना रहे हैं।
युद्ध और शांति के बीच का संघर्ष: पिछले 24 घंटे के मुख्य अपडेट्स
- सीजफायर के बाद भी तनाव: आधिकारिक युद्धविराम लागू होने के एक घंटे के भीतर ही दक्षिण लेबनान के खियाम इलाके में इजराइली तोपखाने की गोलाबारी की खबरें आई हैं।
- चीन का दखल: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि चीन, ईरान को एडवांस रडार सिस्टम देने पर विचार कर रहा था ताकि उसकी सुरक्षा क्षमता मजबूत हो सके।
- NATO पर बरसे ट्रम्प: ट्रम्प ने फिर नाराजगी जताई कि अमेरिका NATO पर खरबों खर्च करता है, लेकिन ईरान के खिलाफ किसी ने साथ नहीं दिया।
- पीएम मोदी से चर्चा: ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उनसे अच्छी बातचीत हुई है।
- खुफिया चेतावनी: अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के मुताबिक, बमबारी के बावजूद ईरान के पास अब भी हजारों मिसाइलें और ड्रोन सुरक्षित हैं।
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आर्थिक और वैश्विक असर
साउथ कोरिया की मदद: ईरान युद्ध से प्रभावित सप्लाई चेन और आम लोगों के लिए दक्षिण कोरिया ने 38 हजार करोड़ रुपये का राहत पैकेज जारी किया है।
G-7 की चिंता: वॉशिंगटन में हुई G-7 देशों की बैठक में माना गया कि मिडिल ईस्ट में लंबे युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति हो रही है, जिसे रोकना अब अनिवार्य है।
क्या टिकेगा यह समझौता?
ट्रम्प का मानना है कि उन्होंने अब तक दुनिया की 9 जंगें रुकवाई हैं और यह दसवीं होगी। उन्होंने इजराइली और लेबनानी नेताओं को व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया है। लेकिन जमीन पर हिजबुल्लाह के ताजा हमले और इजराइल की ‘सतर्क तैनाती’ बताती है कि शांति की यह राह अभी भी कांटों भरी है।



