Sunday, May 17, 2026
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‘विश्वगुरु’ पर संग्राम: जोशी-भागवत आमने-सामने, ट्रंप के बयान से भड़का सियासी तूफान

भारत को ‘विश्वगुरु’ कहने को लेकर मुरली मनोहर जोशी और मोहन भागवत के बयानों से बहस तेज हो गई है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर विवादित बयान ने राजनीतिक माहौल और गरमा दिया। विपक्ष ने सरकार पर इशारा साधा, जबकि विदेश मंत्रालय ने जाली की टिप्पणी को अज्ञानतापूर्ण और अनुचित बताया। मुद्दे पर विदेशों में राजनीतिक घमासान जारी है।

संदीप पाण्डेय, स्वतंत्र पत्रकार

अपने मुल्क के लिए ‘विश्वगुरु’ शब्द का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। भारत विश्वगुरु नहीं है। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के इस कथन पर अभी मंथन चल ही रहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ भारत को ‘नरक’ कह दिया। अभी यह ‘विवाद थमा नहीं था कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यह कहकर देशवासियों को ‘उलझन’ में डाल दिया कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और इस पर किसी को ‘संदेह’ नहीं होना चाहिए। भारत मजबूत होगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा।

भारत के विश्वगुरु अभी नहीं बनने या फिर भविष्य में हर हाल में बनने की ‘संभावना’ के बीच उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया जो बरसों से अपने-अपने चैनल में भारत को ‘विश्वगुरु’के संबोधन से ‘आत्ममुग्ध’ थे। वैसे अपने भारत के विश्वगुरु होने पर किसको ‘ऐतराज’ हो सकता है। मुरली मनोहर जोशी और भागवत के बयान से यह तो साफ हो गया कि अभी भारत विश्वगुरु नहीं बना है। ऐसे में देश के अनिगनत लोग भी भ्रम में हैं। सोचते होंगे कि अधिकांश चैनल एंकर के साथ ‘सरकारी’ प्रवक्ताओं ने विश्वगुरु की पदवी तो पहले से ही दे दी तो अब इस पर ‘संशय’ कैसा। अब देश को लेकर इस तरह के बयान पर घमासान तो मचना ही था। वह भी ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में जनता के ‘उद्धार’ की होड़ मची है।

महिला आरक्षण विधेयक से जुड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव गिरने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष सड़कों पर दिखाई दे रहा है । देश की महिलाओं के हित की बात का शोर मच रहा है। वैसे इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘झालमुड़ी’ सभी चैनलों पर छाई हुई है। एंकर उसकी भी विशेषता बताते नजर आ रहे हैं। ट्रंप का भारत को नरक समान बताने का बयान भी ‘घमासान’मचाए हुए है। ट्रंप की ऐसी ‘करतूतें’पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं। अनिगनत बार तो उन्होंने भारत-पाक के बीच सीजफायर कराने का दावा किया। यही नहीं खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का ‘प्रबल दावेदार’ बताने वाले ट्रंप ही हैं जो अभी इजरायल के साथ ईरान पर ‘बम-धमाके’ कर रहे हैं। ट्रंप के दिए गए बयान पर वैसे दुनियाभर के लोगों ने भरोसा करना छोड़ चुका है। ईरान से शांति वार्ता के लिए पल-पल में अपनी बात से मुकरने वाले ट्रंप की ‘चतुराई’अभी काम नहीं आ रही। हालत यह है कि वो अपने ही मुल्क में ‘घेरे’ जा रहे हैं। हर रोज नित नए बयान देकर कभी युद्ध खत्म करने का संदेश दे रहे हैं तो कभी हमले की चेतावनी।

ट्रंप का अनोखा ‘किरदार’ किसी को समझ नहीं आ रहा है। ट्रंप तो तभी से खटक रहे हैं जब भारत-पाक के ‘युद्ध’ पर उन्होंने अपना पूरा ‘स्नेह’ पाकिस्तान के प्रति दर्शाया जो आज भी जारी है। अभी भी ईरान के साथ चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान को ही आगे रखा जा रहा है। बात बन नहीं पा रही, इसके लिए ईरान-अमेरिका एक-दूसरे को दोष दे रहे हैं। मजे की बात यह है कि पाकिस्तान को इस कोशिश के लिए बार-बार धन्यवाद दिया जा रहा है। ट्रंप ने भारत को नर्क का स्थान बता दिया, जो वाकई शर्मनाक है। इस पर कोई खासी बहस तो नहीं हुई पर कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर ‘आक्रामक’ रुख अपनाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्रंप के भारत के संदर्भ में ‘अपमानजनक’ पोस्ट साझा किए जाने को लेकर कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी को चुनाव प्रचार से समय निकालकर इस बारे में प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी किस बात से ‘डरे हुए हैं।

अभी विवाद बढ़ ही रहा था कि भारत के विदेश मंत्रालय ने यह जरूर कहा कि ये टिप्पणियां स्पष्ट रूप से अज्ञानतापूर्ण, अनुचित और अभद्र हैं। ये भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं, जो लंबे समय से आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहे हैं। उधर अमेरिकी दूतावास ने इन टिप्पणियों से हुए नुकसान की ‘भरपाई’ करने की कोशिश करते हुए एक संदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि ट्रंप का मानना ​​है कि भारत एक ‘महान’ देश है जिसका नेतृत्व ‘उनके एक अच्छे मित्र’ कर रहे हैं। हालांकि, दूतावास ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ट्रंप ने यह टिप्पणी कहां और कब की थी कि भारत एक महान देश है। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को अभी तक किसी ने नहीं कहा है कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा? जोशी ने कह दिया कि भारत अभी विश्वगुरु नहीं है, लेकिन हमें भविष्य में विश्वगुरु बनने का लक्ष्य जरूर रखना चाहिए। बयानों की यही तो खासियत है कि कभी भी बदले जा सकते हैं, माफी भी मांगी जाए तो कोई बुरी बात नहीं है।

भागवत ने भारत को भविष्य में विश्वगुरु बनने की सौ फीसदी गारंटी दे दी है। अब अमेरिका में भारत को लेकर भाजपा नेता राम माधव के बयान पर भी चर्चा करना जरूरी है। अमेरिका से भारत के ‘प्रगाढ़’ रिश्ते पर दिया गया बयान विवादों में रहा तो माधव ने तुरंत माफी भी मांग ली। असल में माधव ने वॉशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ ‘अच्छे संबंध’ बनाए रखने के लिए क्या नहीं किया। ईरान से तेल खरीदना बंद किया, रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई और अमेरिकी टैरिफ का भी विरोध नहीं किया। तो फिर आखिर भारत अमेरिका के साथ काम करने में कहां कमी कर रहा है? बस फिर क्या था, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि माधव के बयान से यह साफ है कि मोदी सरकार ने अमेरिका को ‘खुश’ करने के लिए भारत के हितों से समझौता किया। विवाद बढ़ने पर माधव ने माफी मांग ली। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, जो कहा वो गलत था। अपने देश में ही नहीं विदेश तक में भारत को लेकर ‘जुबानी महाभारत’ हुई, न कोई जीता न ही हारा।

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Mukesh Kumar
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