नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। खड़गे ने सवाल उठाया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देश भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया और सरकार को 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी।
खड़गे ने सरकार से पूछे 3 सवाल
खड़गे ने कहा कि त्योहारों के समय चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी आम लोगों और कारोबारियों के लिए परेशानी बढ़ा रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार आत्मनिर्भर भारत की बात करती है तो विदेश से चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गन्ने का इस्तेमाल चीनी के बजाय एथेनॉल बनाने में करने से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता पर कितना असर पड़ा है।
70 रुपए किलो तक पहुंची चीनी
देश के कई शहरों में चीनी की कीमत करीब 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। पिछले तीन महीनों में कीमतों में करीब 40% यानी लगभग 19 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है।चीनी के साथ गुड़, चावल और मक्के के आटे की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है।सरकार के मुताबिक कीमत बढ़ने के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से फसल को नुकसान, जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसे कारण हो सकते हैं।
चीनी उत्पादन में कमी का अनुमान
सरकार के अनुसार इस सीजन में देश में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख मीट्रिक टन था। ज्यादा बारिश और गन्ने की फसल में बीमारियों के कारण उत्पादन प्रभावित होने की बात कही गई है।वहीं, सरकार का दावा है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने डीलर्स के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट 30 नवंबर तक लागू की है। इसके अलावा चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है।फिलहाल चीनी की बढ़ती कीमतों ने त्योहारों से पहले आम लोगों और मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है, जबकि सरकार और विपक्ष के बीच इसे लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।



