सीकर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की तैयारियों के बीच सीकर भाजपा में टिकट वितरण से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। जिले में पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और नेताओं के बीच तालमेल की कमी का मुद्दा जयपुर में हुई संगठन की बैठक में भी उठा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा के वरिष्ठ संगठन पदाधिकारियों ने नेताओं को साफ संदेश दिया कि अब पुराने चुनावों में हार के कारण गिनाने के बजाय पंचायत चुनाव में जीत की रणनीति पर ध्यान देना होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, संगठन महामंत्री अजेय कुमार और महामंत्री श्रवण बगड़ी ने सीकर के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की। इस दौरान नगर निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन और हार के कारणों पर चर्चा होने लगी। बताया जाता है कि संगठन की ओर से नेताओं को स्पष्ट किया गया कि पिछली हार पर सफाई देने के बजाय आगामी पंचायतीराज चुनाव के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाए।
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पंचायत चुनाव में एकजुटता पर जोर, नेताओं से मांगा जीत का रोडमैप
बैठक में मुख्यमंत्री और संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पंचायत चुनाव में सफलता के लिए सभी नेताओं को मिलकर काम करना होगा। पार्टी के भीतर आपसी खींचतान जारी रहने पर पंचायत समितियों में जीत हासिल करना मुश्किल हो सकता है। मुख्यमंत्री ने विधायकों और विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों से उनके क्षेत्रों की पंचायत समितियों को लेकर जानकारी भी ली। संगठन का जोर इस बात पर रहा कि स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए, ताकि चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं में किसी तरह का असमंजस न रहे।
बैठक में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा, सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर, धोद विधायक गोरधन वर्मा, खंडेला विधायक सुभाष मील, पूर्व सांसद सुमेधानंद सरस्वती, यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष हरिराम रणवां, जिलाध्यक्ष मनोज बाटड़, गजानंद कुमावत, श्रवण चौधरी और मधुसूदन भिण्डा सहित कई नेता मौजूद रहे।
टिकट वितरण से पहले गुटबाजी ने बढ़ाई भाजपा की चिंता
सीकर भाजपा में पिछले कुछ महीनों से अंदरूनी खींचतान की चर्चा चल रही है। पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच यह विवाद और बढ़ गया, जब एक वरिष्ठ नेता की ओर से चुनावी सर्वे के लिए अपने स्तर पर टीमें गठित किए जाने का मामला सामने आया। इससे पार्टी के भीतर चुनाव की अगुवाई और टिकट वितरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
पंचायत चुनाव में किस नेता की कितनी भूमिका होगी और टिकट तय करने में किसकी राय को प्राथमिकता मिलेगी, इसे लेकर भी सियासी हलचल बताई जा रही है। ऐसे में संगठन की बैठक को नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में संगठन की ओर से यह संदेश भी दिया गया कि शेखावाटी में कांग्रेस को चुनौती देने के लिए भाजपा नेताओं को आपसी मतभेद दूर करने होंगे। पार्टी की रणनीति है कि चुनाव से पहले संगठन को मजबूत किया जाए और स्थानीय स्तर पर सभी नेताओं को साथ लेकर चला जाए।
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नगर निकाय चुनाव में सिंबल बदलने का मामला भी उठा
बैठक में पिछले नगर निकाय चुनाव से जुड़ा एक विवाद भी चर्चा में आया। एक नगर निकाय में संगठन की मंजूरी के बाद भी चुनाव चिह्न बदलने का मामला उठाया गया। हालांकि, चर्चा के बाद मुख्यमंत्री और संगठन महामंत्री ने फिर यही जोर दिया कि सभी नेता अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी की सफलता के लिए मिलकर काम करें। नगर निकाय चुनाव के अनुभवों से सबक लेते हुए भाजपा अब पंचायत चुनाव में ऐसी गलतियों से बचने की कोशिश कर रही है, जिनका असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
संगठन प्रभारी बोले, भाजपा पूरी तरह एकजुट
भाजपा के संगठन प्रभारी वासुदेव चावला ने पार्टी में गुटबाजी की चर्चाओं के बीच संगठन को एकजुट बताया। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर पदाधिकारी तक चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। टिकट वितरण में जिले के सभी वरिष्ठ नेताओं की राय ली जाएगी और पार्टी में फैसले किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं होते। चावला के मुताबिक, भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है और सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंचायत चुनाव में पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतरेगी और शेखावाटी में बेहतर प्रदर्शन करेगी।
फिलहाल सीकर भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण से पहले आपसी तालमेल बनाए रखने की है। संगठन की कोशिश है कि चुनावी रणनीति पर मतभेद हावी न हों और सभी नेता मिलकर पंचायत समितियों में पार्टी की जीत के लिए काम करें।



