Friday, October 9, 2026
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राजस्थान में DAP की किल्लत पर सियासत तेज, अशोक गहलोत ने सरकार को घेरा; कालाबाजारी रोकने की मांग

राजस्थान में डीएपी खाद की किल्लत को लेकर अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा और कालाबाजारी रोकने की मांग की। वहीं, कृषि मंत्री ने प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक स्टॉक होने का दावा किया। जानिए डीएपी की उपलब्धता और सरकार की तैयारी से जुड़ी पूरी खबर।

जयपुर। राजस्थान में रबी की फसलों की बुवाई के बीच डीएपी खाद की उपलब्धता को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने खाद की कमी और कथित कालाबाजारी को लेकर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को 1,350 रुपये में मिलने वाला डीएपी का कट्टा 2,100 से 2,200 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और जरूरत के अनुसार जिलों में आपूर्ति की निगरानी की जा रही है।

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अशोक गहलोत ने डबल इंजन सरकार पर उठाए सवाल

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि सितंबर से राजस्थान के अलग-अलग जिलों में डीएपी की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक, सरसों की बुवाई के अहम समय पर किसानों को खाद के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर डीएपी के साथ नैनो डीएपी जैसे दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है।

गहलोत ने कहा कि सहकारी समितियों की ओर से खाद की मांग भेजे जाने के बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसानों को महंगे दाम पर खाद खरीदकर बुवाई करने के लिए मजबूर होना पड़े, तो इसे विकास कैसे कहा जा सकता है। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराई जाए और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने डीएपी की कमी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

कृषि मंत्री का दावा, प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता

डीएपी की किल्लत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने खाद की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के अनुसार, प्रदेश में रबी सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह में आकर जरूरत से ज्यादा खाद न खरीदें और न ही उसका अनावश्यक भंडारण करें।

सरकार के मुताबिक, राज्य में फिलहाल 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 97 हजार मीट्रिक टन एनपीके और 2.08 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक उपलब्ध है। कृषि विभाग उन जिलों और ब्लॉकों पर विशेष ध्यान दे रहा है, जहां खाद की खपत ज्यादा है या उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। ऐसे क्षेत्रों में मांग के आधार पर प्राथमिकता से आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार उर्वरक मिल सकें। सरकार का कहना है कि खाद की आपूर्ति और वितरण पर निगरानी रखी जा रही है।

खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए टास्क फोर्स की बैठक

रबी सीजन 2026-27 में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए राज्य स्तर पर भी कदम उठाए गए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में ‘फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स’ की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में खाद की उपलब्धता, मांग के अनुरूप आपूर्ति और जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर रोक लगाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को बुवाई के समय खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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तिलहन और दलहन की बुवाई बढ़ाने के हिसाब से तैयार हुई योजना

राज्य सरकार ने रबी सीजन में अलग-अलग फसलों के प्रस्तावित रकबे को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों की जरूरत का आकलन किया है। कृषि मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से तिलहन और दलहन की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी के अनुरूप इन फसलों का प्रस्तावित बुवाई क्षेत्र बढ़ाया गया है, जबकि अनाज की फसलों का क्षेत्र घटाने की योजना है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रबी 2025-26 में राजस्थान में 39.82 लाख हेक्टेयर में तिलहन, 20.69 लाख हेक्टेयर में दलहन और 42.77 लाख हेक्टेयर में अनाज की बुवाई हुई थी। वहीं, रबी 2026-27 के लिए 40.06 लाख हेक्टेयर में तिलहन, 21.95 लाख हेक्टेयर में दलहन और 38.50 लाख हेक्टेयर में अनाज की बुवाई प्रस्तावित है। सरकार का कहना है कि फसलवार क्षेत्रफल और उर्वरकों की अनुमानित मांग के आधार पर आपूर्ति एवं वितरण की योजना तैयार की गई है।

खाद की उपलब्धता और जमीनी हालात पर टिकी नजर

राजस्थान में डीएपी की उपलब्धता को लेकर कांग्रेस और भाजपा सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक तरफ अशोक गहलोत किसानों को महंगे दाम पर खाद मिलने और कालाबाजारी की शिकायतों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार पर्याप्त स्टॉक और लगातार निगरानी का दावा कर रही है।

अब अहम यह है कि सरकारी आंकड़ों के साथ किसानों को स्थानीय स्तर पर कितनी आसानी से खाद मिल पाती है और कालाबाजारी की शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है। रबी की बुवाई के इस दौर में खाद की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

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