जयपुर। NSUI की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ 13 अक्टूबर को दिल्ली में हुई कथित मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जीरो FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर राजस्थान पुलिस और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जयपुर पुलिस का कहना है कि मामले में दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में पहले से केस दर्ज है, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाते हुए FIR का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
जयपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय सिंह ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि 13 अक्टूबर को दिल्ली में रितु बराला और दिल्ली पुलिस की एक महिला पुलिसकर्मी के बीच कथित हाथापाई हुई थी। इस मामले में कनॉट प्लेस थाने में केस नंबर 291/2026 दर्ज है। उनके मुताबिक, रितु बराला ने भी इसी थाने में अपनी शिकायत दी थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने प्राप्त कर संबंधित रिकॉर्ड में शामिल कर लिया।
अजय सिंह ने कहा कि जब शिकायत दिल्ली में पहले ही दी जा चुकी है, तो जयपुर में जीरो FIR दर्ज कराने की मांग का औचित्य नहीं बनता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीरो FIR का प्रावधान ऐसी स्थिति में उपयोगी होता है, जब शिकायतकर्ता संबंधित थाना क्षेत्र में शिकायत दर्ज नहीं करा पाता और किसी अन्य थाने में शिकायत देता है। बाद में मामला संबंधित थाने को भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि 19 अक्टूबर को जयपुर के मोती डूंगरी थाने में भी इस मामले को लेकर परिवाद दिया गया था। पुलिस के अनुसार, दिल्ली में शिकायत पहले से दर्ज होने के कारण राजस्थान पुलिस की ओर से अलग से जीरो FIR दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है।
डोटासरा ने पुलिस के दावे पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि रितु बराला की शिकायत पर कौन-सी FIR दर्ज हुई है और वह कहां दर्ज है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि 13 अक्टूबर की घटना के दौरान तीन पुलिसकर्मियों ने रितु बराला के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया, उनके कपड़े फाड़े और उन्हें चोटें पहुंचाईं। डोटासरा के मुताबिक, घटना के बाद रितु बराला को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और वह मानसिक रूप से भी परेशान रहीं। उन्होंने बताया कि 19 अक्टूबर को कांग्रेस नेता जयपुर के मोती डूंगरी थाने पहुंचे थे और वहां परिवाद सौंपा था, जिसकी रिसीविंग भी मिली थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इसके बाद नेताओं को जयपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय भेजा गया। कमिश्नर के उपलब्ध नहीं होने पर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर जानकारी देने की बात कही थी।
फिलहाल, इस मामले में जीरो FIR को लेकर राजस्थान पुलिस और कांग्रेस के बीच विवाद जारी है। पुलिस का कहना है कि शिकायत दिल्ली में पहले से दर्ज है, जबकि कांग्रेस शिकायत पर दर्ज FIR की स्थिति और विवरण स्पष्ट करने की मांग कर रही है।



