जयपुर। राजस्थान के चर्चित वरिष्ठ RAS अधिकारी पंकज ओझा एक बार फिर विवादों में हैं। राज्य सरकार ने करीब एक साल पहले सोशल मीडिया पर की गई कथित जातीय, सांप्रदायिक और राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर उन्हें चार्जशीट जारी की है। कार्मिक विभाग ने अधिकारी से 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। फिलहाल पंकज ओझा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
पीएम और सीएम को लेकर अभद्र पोस्ट करने का आरोप
कार्मिक विभाग की ओर से जारी चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि गोपालन निदेशक रहते हुए पंकज ओझा ने अपनी फेसबुक आईडी ‘RAS Pankaj Ojha’ से अक्टूबर 2025 में कई विवादित पोस्ट की थीं। इनमें 16, 19, 21 और 22 से 25 अक्टूबर के साथ 27 अक्टूबर को की गई पोस्ट और साझा की गई सामग्री शामिल है। आरोप है कि इन पोस्ट में राजनीतिक, धार्मिक और जातिगत मुद्दों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। साथ ही प्रधानमंत्री, कुछ राज्यों के मौजूदा और पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ भी कथित तौर पर अपमानजनक भाषा वाली तस्वीरें और सामग्री साझा की गई।
नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब
चार्जशीट के अनुसार, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शिकायत मिलने के बाद कार्मिक विभाग ने 19 जनवरी 2026 को पंकज ओझा को नोटिस जारी किया था। उनसे तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन विभाग का आरोप है कि उन्होंने नोटिस का जवाब नहीं दिया। विभाग ने इन टिप्पणियों को एक राजकीय अधिकारी की गरिमा, सामाजिक और धार्मिक सद्भाव तथा संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत माना है।
जातिगत जनगणना पर पोस्ट भी बनी कार्रवाई की वजह
चार्जशीट में 25 अक्टूबर 2025 की एक फेसबुक पोस्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इसमें पंकज ओझा ने जातिगत जनगणना को लेकर सवाल उठाते हुए लिखा था कि जातिगत जनगणना के साथ जातिगत करदाताओं और जातिगत अपराधों के आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि सभी के योगदान का पता चल सके। कार्मिक विभाग ने इस पोस्ट को केंद्र सरकार की नीति की आलोचना मानते हुए इसे सरकारी सेवा की आचरण मर्यादा के खिलाफ बताया है।
सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
सरकार ने पंकज ओझा के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम-1971 के नियम 3, 4 और 11 के उल्लंघन का आरोप लगाया है। विभाग का कहना है कि एक सरकारी अधिकारी को अपने आचरण में मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की टिप्पणियां सरकार और विभाग की छवि को प्रभावित करती हैं तथा गंभीर कदाचार की श्रेणी में आती हैं।चार्जशीट जारी होने के बाद विभाग ने पंकज ओझा को किसी भी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक सिफारिश नहीं करवाने के लिए भी पाबंद किया है।



