जयपुर। राजस्थान में पानी और चारे की संभावित कमी को लेकर सरकार ने अलर्ट जारी किया है। पानी-चारे की स्थिति के आधार पर प्रदेश के जिलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। सरकार के आकलन के अनुसार 9 जिले क्रिटिकल, जबकि 22 जिले सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में रखे गए हैं। वहीं 17 जिलों की स्थिति को रिलेटिवली सेफ बताया गया है।
9 जिले क्रिटिकल श्रेणी में
पानी और चारे की संभावित गंभीर स्थिति को देखते हुए पाली, उदयपुर, राजसमंद, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, ब्यावर और दौसा को क्रिटिकल जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों में पानी और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता को लेकर विशेष निगरानी की जा रही है।
22 जिले सेमी-क्रिटिकल
सरकार के आकलन में जयपुर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, जालोर, सीकर, सिरोही, झुंझुनूं, नागौर, कोटपूतली-बहरोड़ और सवाई माधोपुर समेत कुल 22 जिलों को सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है। वहीं अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा समेत 17 जिलों को पानी और चारे की स्थिति के लिहाज से फिलहाल रिलेटिवली सेफ श्रेणी में रखा गया है।
पंजाब, हरियाणा और MP से मांगा चारा
राजस्थान में चारे की कमी को देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश सरकारों को पत्र भेजकर सहयोग मांगा है। पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव की ओर से तीनों राज्यों से चारे की उपलब्धता बढ़ाने में सहयोग की अपील की गई है। विभागीय अधिकारियों की टीमें 8 से 10 अक्टूबर तक पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश का दौरा करेंगी। इस दौरान अधिकारी चारा मंडियों और प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे। साथ ही चारे की उपलब्धता, कीमतों और सप्लाई चेन की स्थिति का फीडबैक लिया जाएगा।
पराली को चारे के रूप में उपलब्ध कराने पर जोर
राजस्थान सरकार ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने तथा उसके औद्योगिक उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। सरकार का जोर है कि अधिक से अधिक पराली को पशु चारे के लिए उपलब्ध कराया जाए। पराली को थर्मल पावर प्लांट और ईंट-भट्ठों में जलाने के बजाय चारे के रूप में उपयोग किए जाने की मांग की गई है। साथ ही बिचौलियों द्वारा पराली की कृत्रिम जमाखोरी कर कीमत बढ़ाने पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
अधिकारियों को दी गई राज्यों की जिम्मेदारी
पंजाब के लिए डॉ. प्रवीण सेन और डॉ. गणेश गोयल की टीम को जिम्मेदारी दी गई है। मध्य प्रदेश के लिए डॉ. विकास शर्मा, डॉ. संदीप सारस्वत और शैतान सिंह की टीम काम करेगी। वहीं हरियाणा के लिए डॉ. रविंद्र मलिक और डॉ. हितेश गौतम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कम बारिश से बढ़ी चिंता
राजस्थान में कम बारिश के कारण पानी और चारे की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है। सरकार के आकलन में कई जिलों में चारे की स्थिति गंभीर बताई गई है। ऐसे में क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल जिलों में पानी और चारे की उपलब्धता पर विशेष निगरानी रखने के साथ दूसरे राज्यों से चारे की आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।



