Friday, October 30, 2026
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रमेश मीणा की अशोक गहलोत को खुली चुनौती, बोले-‘कोई सबूत हैं, तो मैं नार्को टेस्ट के लिए तैयार’

Gehlot vs Pilot: कांग्रेस नेता रमेश मीणा ने 2020 के राजनीतिक संकट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ पैसे लेने के सबूत हैं तो उनका नार्को टेस्ट कराया जाए, साथ ही गहलोत का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए। मीणा ने आरोप लगाया कि 2020 में सरकार बचाने के लिए विधायकों को धन दिया गया था और दावा किया कि उनके पास इससे जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं।

Gehlot vs Pilot: राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर 2020 के राजनीतिक संकट को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता रमेश मीणा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि यदि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों के कोई सबूत हैं, तो उनका नार्को टेस्ट करवाया जाए. साथ ही उन्होंने मांग की कि अशोक गहलोत का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके.

गहलोत खेमे ने उठाया 2020 की राजनीतिक बगावत का मुद्दा

दरअसल, हाल ही में गहलोत खेमे की ओर से एक बार फिर 2020 की राजनीतिक बगावत का मुद्दा उठाया गया है. आरोप लगाया जा रहा है कि उस दौरान कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले कुछ विधायकों ने सरकार गिराने के लिए 10 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर लिए थे. रमेश मीणा भी उस समय बागी खेमे का हिस्सा रहे थे, इसलिए उनका नाम भी इस विवाद में चर्चा में आया.

रमेश मीणा ने आरोपों पर दी प्रतिक्रिया

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रमेश मीणा ने कहा कि जब भी कांग्रेस संगठन मजबूत होने लगता है और पार्टी में एकजुटता बढ़ती है, तब ऐसे पुराने और बेबुनियाद आरोपों को दोबारा उछाला जाता है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने किसी प्रकार की धनराशि नहीं ली और यदि कोई उनके खिलाफ प्रमाण प्रस्तुत कर दे, तो वह नार्को टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं.

‘अशोक गहलोत का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए’

करौली में आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए रमेश मीणा ने अशोक गहलोत पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि केवल उनका ही नहीं, बल्कि अशोक गहलोत का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वर्ष 2020 के राजनीतिक संकट के दौरान सरकार बचाने के लिए निर्दलीय, भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) और भाजपा के विधायकों को कितना पैसा दिया गया था. मीणा ने दावा किया कि उनके पास इस संबंध में दस्तावेजी प्रमाण भी मौजूद हैं.

2020 राजनीतिक संकट क्या था ?

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में सचिन पायलट, रमेश मीणा और कई अन्य कांग्रेस विधायकों ने अशोक गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी. उस समय राजस्थान की कांग्रेस सरकार गंभीर राजनीतिक संकट में घिर गई थी. बाद में कांग्रेस हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद विवाद सुलझा और सरकार बच गई. हालांकि इस घटनाक्रम के बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था. अब एक बार फिर उसी विवाद को लेकर कांग्रेस के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है.

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