Share Market Update News : मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत को कमजोर कर दिया। वैश्विक बाजारों में जारी नरमी के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और अमेरिका में महंगाई दर में बढ़ोतरी ने निवेशकों की धारणा को और अधिक प्रभावित किया है।बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 358.54 अंक की गिरावट के साथ 73,624.64 अंक पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 117 अंक टूटकर 23,098.30 अंक के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में व्यापक बिकवाली का दबाव देखने को मिला, खासकर आईटी और मिडकैप शेयरों में कमजोरी रही।
सेंसेक्स में शामिल 30 प्रमुख कंपनियों में एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इटर्नल और ट्रेंट के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इन शेयरों पर वैश्विक तकनीकी मांग में सुस्ती और अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का सीधा असर दिखाई दिया। हालांकि, कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती भी देखी गई। पावर ग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल और इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार को आंशिक समर्थन मिला।
एशियाई बाजारों में भी दबाव का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता कमजोर पड़ी है। उधर, अमेरिकी बाजार बुधवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर एशिया और भारत दोनों पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मानक ब्रेंट क्रूड 1.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.64 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जिससे महंगाई और लागत दबाव की चिंताएं बढ़ गई हैं।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) बुधवार को शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने 2,124.98 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिकवाली की। लगातार बिकवाली ने बाजार में कमजोरी को और गहरा किया है। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 64.42 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 27.15 अंक की गिरावट के साथ समाप्त हुआ था। लेकिन मौजूदा वैश्विक संकेतों के चलते बाजार का रुख एक बार फिर दबाव में आ गया है।



