Tuesday, August 18, 2026
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राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ क्यों नहीं? विवाद के बीच भजनलाल सरकार ने दिया यह तर्क

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ न कराने पर भजनलाल सरकार ने विकास कार्य रुकने का तर्क दिया है। वहीं, संयम लोढ़ा ने हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप लगाया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के आगामी चुनावों को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया को सितंबर 2026 तक टालने के फैसले से यह साफ हो गया है कि प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग समय पर आयोजित होंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग जहाँ जल्द ही प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के चुनावों का ऐलान करने वाला है, वहीं पंचायत चुनाव टलने पर सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार के इस कदम को हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना बताते हुए विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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सरकार का तर्क: ‘एक साथ चुनाव से थम जाते विकास कार्य’

दोनों चुनाव अलग-अलग कराने के फैसले पर राज्य सरकार ने प्रशासनिक वजहों का हवाला दिया है। सरकार का तर्क है कि यदि निकाय और पंचायती राज चुनावों का ऐलान एक साथ किया जाता, तो पूरे राज्य में एक ही समय पर आचार संहिता लागू हो जाती। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जारी विकास कार्य, नई योजनाओं की स्वीकृतियाँ और प्रशासनिक काम पूरी तरह ठप हो जाते। प्रशासनिक तंत्र पर दबाव कम करने और विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए ही यह फैसला लिया गया है।

हाई कोर्ट जाएंगे संयम लोढ़ा, पूर्व चुनाव आयुक्त ने भी उठाए सवाल

पंचायती राज लॉटरी रोके जाने पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि सरकार को 15 अगस्त से पहले लॉटरी प्रक्रिया पूरी करनी थी, लेकिन इसे अचानक रोक दिया गया जो हाई कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। वे इसके खिलाफ कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने जा रहे हैं।

वहीं, पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने भी इस निर्णय पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की बात होती है और दूसरी तरफ दोनों चुनाव अलग-अलग कराए जा रहे हैं, जो आपस में विरोधाभासी है। उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि निकाय चुनावों के नतीजों का मनोवैज्ञानिक असर बाद में होने वाले पंचायत चुनावों पर पड़ सकता है।

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10,245 वार्डों की लॉटरी पूरी, चुनावी तैयारियों में जुटे दल

इधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने सोमवार को प्रदेश की 309 नगर निकायों के कुल 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इससे पहले अध्यक्ष और महापौर पदों का आरक्षण तय किया जा चुका था। वार्डों की स्थिति साफ होते ही कई पुराने दावेदारों के समीकरण बदल गए हैं और नए चेहरे चुनावी दौड़ में शामिल हो गए हैं।

जयपुर स्थित बीजेपी और कांग्रेस मुख्यालयों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर बैठकों का दौर तेज हो चुका है। आयोग के अनुसार, सरकार द्वारा लॉटरी प्रक्रिया पूरी होते ही 15 नवंबर 2026 से पहले स्थानीय निकायों के चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे।

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