जयपुर। राजस्थान की राजनीति में समय के साथ भले ही कई सियासी समीकरण और चेहरे बदल गए हों, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का दबदबा आज भी पूरी तरह बरकरार है। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय संगठन में हुए ताजा फेरबदल के बाद यह बात एक बार फिर साबित हो गई है। पार्टी हाईकमान ने वसुंधरा राजे पर लगातार तीसरी बार भरोसा जताते हुए उन्हें फिर से बीजेपी का ‘राष्ट्रीय उपाध्यक्ष’ नियुक्त किया है।

सीएम रेस से राष्ट्रीय संगठन तक का सफर
दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद वसुंधरा राजे का नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहा था। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व ने राज्य की कमान नए चेहरे को सौंपने का फैसला किया। इसके बावजूद, पार्टी में उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और जनधार को देखते हुए आलाकमान ने उन्हें केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा है।
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2019 में शुरू हुई थी केंद्रीय सांगठनिक यात्रा
राजस्थान में 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद वसुंधरा राजे ने 11 जनवरी 2019 को पहली बार केंद्रीय संगठन में कदम रखा था। तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 के आम चुनावों से ठीक पहले उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। उस दौरान मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह को भी यही जिम्मेदारी दी गई थी। जेपी नड्डा के कार्यकाल में भी वे इस पद पर बनी रहीं और अब उन्होंने इस जिम्मेदारी की ‘हैट्रिक’ पूरी कर ली है।
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अटल सरकार से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक गहरा अनुभव
वसुंधरा राजे का केंद्र से जुड़ाव काफी पुराना है। वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में विदेश राज्य मंत्री और लघु उद्योग मंत्री जैसे अहम मंत्रालयों का प्रभार संभाल चुकी हैं। दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे का राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत जनाधार है। यही वजह है कि फेरबदल के दौर में भी बीजेपी हाईकमान उनके अनुभव का लाभ राष्ट्रीय स्तर पर लगातार ले रहा है।



