जयपुर। देश के जनप्रतिनिधियों—पूर्व और वर्तमान सांसदों व विधायकों—पर लंबित आपराधिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश भर की अदालतों में इस श्रेणी के कुल 4,442 मुकदमे विचाराधीन हैं। हालांकि पिछले एक साल के दौरान 1,243 मुकदमों का निपटारा किया जा चुका है, फिर भी 519 मामले ऐसे हैं जो पिछले 10 से भी अधिक वर्षों से पेंडिंग पड़े हैं।
इतना ही नहीं, बीते एक साल में पूर्व और मौजूदा जनप्रतिनिधियों पर 1,050 नए आपराधिक केस भी दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, राजस्थान के लिहाज से राहत की खबर यह है कि करीब आठ साल बाद प्रदेश में ऐसे लंबित मामलों की संख्या घटकर 50 के नीचे आ गई है।
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न्यायमित्र विजय हंसारिया ने शीर्ष अदालत में सौंपी 22वीं रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमों की निगरानी के लिए नियुक्त न्यायमित्र (Amicus Curiae) और वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने यह रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखी। यह इस विषय पर उनके द्वारा सौंपी गई 22वीं विस्तृत रिपोर्ट है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
- 14 मौजूदा मुख्यमंत्री ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
- 335 वर्तमान सांसदों और 269 पूर्व सांसदों पर मुकदमे चल रहे हैं।
- 1,222 वर्तमान विधायकों और 1,339 पूर्व विधायकों के खिलाफ आपराधिक केस लंबित हैं।
- देश भर में 700 मामले ऐसे हैं जिनमें पुलिस या जांच एजेंसियों की तफ्तीश अब तक अधूरी है, जबकि 360 मुकदमों में तो तीन साल से ज्यादा समय से जांच अटकी हुई है।
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राजस्थान में सुधरे हालात: 8 साल बाद 50 से नीचे आया आंकड़ा
राजस्थान की स्थिति में पहले के मुकाबले सुधार देखा गया है। हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार राज्य में वर्तमान में कुल 41 मामले पेंडिंग हैं, जबकि न्यायमित्र की रिपोर्ट में यह संख्या 49 बताई गई है।
राजस्थान में पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड (लंबित मामले):
- दिसंबर 2018: 49 केस
- दिसंबर 2021: 56 केस
- नवंबर 2022: 57 केस
- जनवरी 2024: 57 केस
- जनवरी 2025: 53 केस
- जुलाई 2026: 49 केस
राज्य में मुकदमों के त्वरित निस्तारण के चलते 2018 के बाद पहली बार यह आंकड़ा घटकर 50 से नीचे पहुंचा है।



