जयपुर। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस—दोनों ही पार्टियों ने अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। जयपुर स्थित दोनों दलों के प्रदेश मुख्यालयों में बैठकों का दौर चला, जिसमें प्रत्याशियों के चयन और टिकट वितरण को लेकर बेहद कड़े नियम तय किए गए हैं।
दोनों ही पार्टियों की नई गाइडलाइंस के सामने आने के बाद प्रदेश भर के 309 नगरीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में चुनावी दावेदारी ठोक रहे कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
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भाजपा (BJP): सिफारिशी कल्चर पर रोक, ‘जेन-जी’ और जिताऊ उम्मीदवार ही पहली पसंद
प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की मौजूदगी में हुई बैठक में निकाय चुनाव के लिए रोडमैप तैयार किया गया। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल और निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
- नो-नेपोटिज्म और विनिंग फैक्टर: पार्टी ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह का भाई-भतीजावाद या पारिवारिक सिफारिश काम नहीं आएगी। टिकट देने का एकमात्र आधार उम्मीदवार का स्थानीय जनाधार और चुनाव जीतने की क्षमता (Winning Factor) ही होगा।
- ‘जेन-जी’ युवाओं पर दांव: बीजेपी इस बार 18 से 25 वर्ष की उम्र के सक्रिय युवाओं यानी ‘जेन-जी’ (Gen-Z) को सीधे चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
- कामकाज बनेगा मुद्दा: चुनाव में राज्य सरकार के अब तक के विकास कार्यों को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा। इसके लिए आईटी और सोशल मीडिया की विशेष टीमें भी तैनात की जा रही हैं।
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कांग्रेस (Congress): बाहरी प्रत्याशियों की ‘नो-एंट्री’, 50% युवाओं को मिलेगा मौका
दूसरी तरफ, प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्यभर के नेताओं और जिलाध्यक्षों के साथ मैराथन बैठक की।
- ‘जिस वार्ड का वोटर, वहीं से टिकट’: कांग्रेस ने पैराशूट या बाहरी उम्मीदवारों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब कोई भी नेता केवल उसी वार्ड से चुनाव लड़ पाएगा, जहाँ की मतदाता सूची में उसका नाम दर्ज होगा।
- युवाओं को 50% तरजीह: संगठन ने 50 फीसदी टिकट युवाओं को देने का ऐलान किया है। केवल वही कार्यकर्ता प्राथमिकता पाएंगे जो धरातल पर लगातार सक्रिय रहे हैं।
- बायोडाटा की ऑनलाइन व ऑफलाइन स्क्रीनिंग: इस बार दावेदारों को ऑनलाइन पोर्टल के साथ-साथ ऑफलाइन फॉर्म भी भरना होगा। इसमें उन्हें अपना पूरा राजनीतिक सफर, पुराने पद और चुनावी समीकरणों की जानकारी देनी होगी।



