जयपुर। त्योहारों के सीजन में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए राजस्थान पुलिस की CID क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में पाली जिले के फालना स्थित एक फैक्ट्री पर खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए 8,303 लीटर संदिग्ध मिलावटी घी सीज किया गया। मौके से घी के रैपर, उपकरण और मिलावट में इस्तेमाल होने की आशंका वाली सामग्री भी मिली है।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, ‘शुद्ध आहार-मिलावट पर वार’ अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध शाखा) बिपिन कुमार पाण्डेय के निर्देशन में सीआईडी क्राइम ब्रांच की टीम मिलावटखोरी से जुड़ी सूचनाएं जुटा रही थी। इसी दौरान टीम को सूचना मिली कि पाली जिले के फालना स्थित जादरी रीको क्षेत्र में श्री किसान डेयरी एंड फूड प्राइवेट लिमिटेड की फैक्ट्री में कथित तौर पर अमानक सामग्री से घी तैयार कर सस्ते दामों पर बाजार में बेचा और सप्लाई किया जा रहा है। सूचना का सत्यापन करने के बाद पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई की।
फैक्ट्री से घी के रैपर और उपकरण भी मिले
कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री से श्री किसान मार्का का 8,303 लीटर संदिग्ध घी बरामद किया गया। अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में घी को खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने की आशंका के चलते उसे सीज कर दिया। मौके से घी की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले रैपर, उपकरण और अन्य सामग्री भी मिली।
सैंपल जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग ने घी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घी की गुणवत्ता और उसमें मिलावट की स्थिति स्पष्ट होगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले में फैक्ट्री मालिक खेताराम माली, निवासी मोडिया बेरा, रणकपुर रोड, सादड़ी, पाली से पूछताछ की जा रही है।
सीआईडी टीम की अहम भूमिका
यह कार्रवाई उपनिरीक्षक शैलेन्द्र शर्मा के सुपरविजन में की गई। टीम में एएसआई शंकर दयाल, हेड कांस्टेबल रविन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल रामसिंह और कांस्टेबल नरेश कुमार शामिल रहे। पुलिस के अनुसार, हेड कांस्टेबल रविन्द्र सिंह की सूचना संकलन और तकनीकी भूमिका इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण रही। त्योहारी सीजन को देखते हुए पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य बाजार में संदिग्ध और मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाना है।



