Thursday, July 16, 2026
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लोकसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के प्रयास को सराहा, पहल को बताया देशभर के लिए मिसाल

राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष समारोह में वर्तमान और पूर्व विधायकों का ऐतिहासिक समागम हुआ। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल को अनूठा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने वाला बताया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसे जनप्रतिनिधियों का "महाकुंभ" कहा।

Rajasthan Assembly 75th Anniversary:जयपुर। राजस्थान विधानसभा के गौरवशाली 75 वर्षों की लोकतांत्रिक यात्रा के अमृत महोत्सव में वर्तमान और पूर्व विधायकों का ऐसा भव्य समागम देखने को मिला, जिसने लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मूल्यों को नई ऊर्जा दी. इस अवसर पर कई पूर्व विधायक वर्षों बाद सदन में पहुंचकर भावुक नजर आए. इस विशेष आयोजन में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा रही. समारोह को लोकतंत्र के उत्सव के रूप में देखा गया और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल की सभी दलों के नेताओं ने खुलकर सराहना की.

उपराष्ट्रपति बोले- यह पहल वास्तव में अनूठी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की यह पहल वास्तव में अनूठी और ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि वर्तमान और पूर्व विधायकों का यह समागम लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने वाला है. उन्होंने विशेष रूप से इस बात की सराहना की कि पूरे आयोजन में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर लोकतंत्र की भावना दिखाई दी.

ओम बिरला ने बताया जनप्रतिनिधियों का महाकुंभ

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस आयोजन को जनप्रतिनिधियों का “महाकुंभ” बताते हुए कहा कि इसकी परिकल्पना और सफल आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी बधाई के पात्र हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर बहुत कम देखने को मिलते हैं और राजस्थान विधानसभा में यह पहली बार हुआ है.

पूर्व विधायकों ने साझा किए अनुभव

समारोह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे पूर्व और वर्तमान विधायकों ने विधानसभा की गौरवशाली परंपराओं को याद किया. कई पूर्व विधायक वर्षों बाद सदन में पहुंचकर भावुक हो गए. उन्होंने अपने संसदीय अनुभव साझा किए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाने के सुझाव भी दिए.

410 जनप्रतिनिधि बने आयोजन के साक्षी

राजस्थान विधानसभा में पहली बार आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कुल 410 जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया. इनमें 237 पूर्व विधायक, 163 वर्तमान विधायक और 10 ऐसे पूर्व विधायक भी शामिल रहे, जिन्होंने पूर्व पंजीकरण नहीं कराया था. यह आयोजन राजस्थान विधानसभा की लोकतांत्रिक विरासत, संसदीय गरिमा और विभिन्न पीढ़ियों के जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद का ऐतिहासिक मंच बनकर सामने आया.

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Premanshu Chaturvedi
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