जयपुर। राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता शुभम रेवाड़ का आमरण अनशन बुधवार को 14वें दिन भी जारी रहा। उनकी बिगड़ती सेहत ने छात्र समुदाय, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल शुभम रेवाड़ जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनकी लगातार चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि शुभम रेवाड़ ने केवल अन्न ही नहीं, बल्कि पानी और चिकित्सकीय उपचार लेने से भी इनकार कर दिया है। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्होंने ड्रिप, दवाइयों और अन्य मेडिकल सहायता लेने से मना कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय से भोजन और पानी नहीं लेने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
23 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन
शुभम रेवाड़ ने 23 जुलाई को राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर आमरण अनशन शुरू किया था। उनकी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली, प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू किए जाएं। दूसरी, राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का अलग विभाग स्थापित किया जाए ताकि भाषा और संस्कृति को अकादमिक स्तर पर बढ़ावा मिल सके।
तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
अनशन के दौरान 31 जुलाई को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ और रक्तचाप गिरने के बाद पुलिस और प्रशासन ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भी उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त नहीं किया और अस्पताल से ही अनशन जारी रखा।
इलाज और पानी लेने से भी किया इनकार
सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस वार्ता या लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर शुभम रेवाड़ ने आंदोलन को और सख्त कर दिया। उन्होंने अस्पताल में उपचार, ड्रिप और पानी तक लेने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक राज्य सरकार उनकी दोनों मांगों पर लिखित रूप से निर्णय नहीं लेती, तब तक वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
शुभम रेवाड़ की बिगड़ती हालत को लेकर विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर सहित कई जनप्रतिनिधि और छात्र नेता अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जान चुके हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की लोकतांत्रिक मांगों को नजरअंदाज कर रही है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि अनशनकारी छात्र की तबीयत और बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार छात्रों की मांगों पर कोई सकारात्मक पहल करती है या यह आंदोलन आगे और व्यापक रूप लेता है।



